Monday, August 17, 2026
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राष्ट्रीय

ईरानी तेल से प्रतिबंध हटा रहा अमेरिका, नई डील में बनी सहमति; भारत को कैसे फायदा

17 जून, 2026 09:59 AM

वॉशिंगटन दोनों देश शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस डील पर साइन करेंगे। समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को प्रतिबंधों में ढील दी है। अमेरिका ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने और ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट न पैदा करने पर सहमत हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बीते 4 महीने से जारी जंग अब खत्म हो गई है। दोनों देश एक समझौते पर राजी हो गए हैं जिस पर शुक्रवार को आधिकारिक मुहर लगेगी। इस डील के मसौदे को फिलहाल अधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है। हालांकि इससे जुड़े कई डिटेल्स सामने आए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो इस समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील देते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और दूसरे ईंधन बेचने की इजाजत दे दी है। यह भारत समेत कई देशों के लिए अच्छी खबर है।

इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में विद्रोही गुटों की फंडिंग के आरोप में ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके तहत ईरान से तेल व्यापार करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाए गए थे। अब नए समझौते के बाद ईरान अपने तेल और ईंधन का व्यापार जारी रख सकेगा। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि ईरान को यह ढील तभी मिलेगी जब वह अमेरिकी शर्तों को पूरा करेगा। इन शर्तों में कभी परमाणु हथियार न बनाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कोई रुकावट न पैदा करना शामिल हैं।

एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने बताया है कि अमेरिका के साथ तय हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में एक निश्चित समयसीमा के लिए ईरान पर तेल प्रतिबंध हटाने का प्रावधान है। इससे तेहरान तेल बेच सकेगा और मुनाफा कमा सकेगा। मसौदे के मुताबिक अंतिम समझौते के बाद ईरान पर लगे दूसरे अमेरिकी प्रतिबंध भी चरणबद्ध तरीके से हटा दिए जाएंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह छूट ईरान के लिए बहुत बड़ी रियायत है। ओब्सिडियन रिस्क एडवाइजर्स के मैनेजिंग प्रिंसिपल ब्रेट एरिक्सन ने इस कदम को ईरान के लिए अरबों डॉलर का फायदा बताया। एरिक्सन के मुताबिक ईरान के पास 10 करोड़ बैरल से ज्यादा का तेल भंडार टैंकरों में मौजूद है, जिसे आसानी से बेचा जा सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी खुलेगा
समझौते पर सहमति बनते ही अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नाकेबंदी भी हटा लेगा। दोनों पक्षों ने इस रास्ते को दोबारा खोलने और व्यापार में किसी तरह की बाधा न डालने की बात कही है। ऐसे में तेल बाजार को एक और राहत मिलेगी। गौरतलब है कि इससे पहले युद्ध शुरू होते ही इस रास्ते पर पहले ईरान ने घेराबंदी कर दी, फिर अमेरिका ने नाकेबंदी कर दी, जिससे जहाजों की आवाजाही ठप हो गई थी। इससे कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया था। युद्ध शुरू होने से पहले वैश्विक तेल व्यापार का 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था। इससे वैश्विक बाजार में हाहाकार मच गया था, तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं और भारत समेत तमाम तेल आयातक देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया था।

भारत को क्या फायदा?
अमेरिका और ईरान के बीच नई डील के तहत प्रतिबंध हटने और तेल बेचने की इजाजत मिलने से भारत को कई आर्थिक और रणनीतिक फायदे होंगे। इस डील की खबर आते ही वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 4 फीसदी से अधिक गिरकर 83 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गईं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में यह 80 डॉलर से नीचे जा सकता है। तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल घटेगा और ईंधन की बढ़ी कीमतों की वजह से बड़ी महंगाई भी कम होगी। इसके अलावा भारतीय रिफाइनरियों को तेल का सस्ता विकल्प मुहैया होगा। भविष्य में ईरान से सीधे सस्ता तेल खरीदने का रास्ता भी साफ हो सकता है।

 

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