नई दिल्ली। सेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान के लिए पहचाने जाने वाले जनरल सेठ ने सेना मुख्यालय की रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में अहम पदों पर काम किया है। आतंकवादियों के लिए काल हैं धीरज सेठ, उपेंद्र द्विवेदी के बाद बनेंगे अगले आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के जांबाज अधिकारियों में गिने जाते हैं। चार दशकों के लंबे कार्यकाल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों और मोर्चों पर काम किया। वर्तमान में वह उप सेना प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने एक जुलाई, 2024 से इस वर्ष 31 मार्च तक विशिष्ट दक्षिणी कमान के 51वें जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया था। पिछले वर्ष पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा निर्णायक सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देने के दौरान वे दक्षिणी कमान के प्रमुख थे।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी से ग्रेजुएशन के बाद, दिसंबर 1986 में उन्हें आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था। इसके अलावा वे वेलिंगटन के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, महू के आर्मी वॉर कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज के भी पूर्व छात्र हैं। उन्होंने फ्रांस के कॉलेज इंटरआर्मे डी डिफेंस में जनरल स्टाफ कोर्स और अमेरिका के नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स किया। यंग ऑफिसर्स कोर्स में उन्हें 'सिल्वर सेंचुरियन' सम्मान मिला था।
बख्तरबंद ब्रिगेड की संभाल चुके हैं कमान
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी बल की कमान संभाल चुके हैं। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली। इसके बाद दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में काम किया, जहां उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया।
मुश्किल से मुश्किल ऑपरेशन को दिया अंजाम
आर्मी कमांडर बनने पर जनरल सेठ ने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान की कमान संभाली। उन्हें दो ऑपरेशनल आर्मी कमान की कमान संभालने और ढाई साल से अधिक समय तक अहम इलाकों में रणनीतिक देखरेख करने का दुर्लभ सम्मान मिला। उन्होंने कई अहम स्टाफ और रणनीतिक पदों पर काम किया है, जिनका ऑपरेशनल प्लानिंग, फोर्स मैनेजमेंट और क्षमता विकास पर काफी असर पड़ा है।
सेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान
सेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान के लिए पहचाने जाने वाले जनरल सेठ ने सेना मुख्यालय की रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में अहम पदों पर काम किया है। उन्होंने इसके आधुनिकीकरण की दिशा, क्षमता रोडमैप और लंबे समय के लिए सेना की संरचना से जुड़ी पहलों को आकार दिया है। ऑपरेशनल जरूरतों को नई तकनीकों और भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों के साथ जोड़ने में उनका योगदान अहम रहा।
घाटी में कई यूनिट की कमान संभाली
लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने आर्मर्ड रेजिमेंट और ब्रिगेड से लेकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी सेना तक कई यूनिट्स की कमान संभाली है। उन्होंने सुदर्शन चक्र कॉर्प्स का नेतृत्व भी किया है और साउथ वेस्टर्न व सदर्न कमांड दोनों की कमान संभाली है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ संचालन अधिकारी, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह और कल्याण के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर काम किया।