भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर/भाकृअनुप) ने नई दिल्ली में अपना 98वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पिछले एक वर्ष में आईसीएआर ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें 94% जलवायु-अनुकूल और 29 जैव-सुदृढ़ीकृत (बायोफोर्टिफाइड) किस्में शामिल हैं। उन्होंने आईसीएआर को भारत के कृषि परिवर्तन का अग्रदूत बताते हुए कहा कि किसान कृषि की आत्मा हैं, जबकि वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क हैं।
98 वर्षों की उपलब्धियों का किया उल्लेख
प्रतिवर्ष 16 जुलाई को मनाया जाने वाला आईसीएआर स्थापना दिवस वर्ष 1928 में परिषद की स्थापना की स्मृति में आयोजित किया जाता है। पिछले 98 वर्षों में आईसीएआर ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार प्रणाली को मजबूत करने, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जलवायु-अनुकूल कृषि और अनुसंधान पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आईसीएआर के वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचारों ने खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध और मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने मांग-आधारित अनुसंधान, जलवायु-अनुकूल कृषि, दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा, प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) नेटवर्क के माध्यम से नवाचारों के व्यापक प्रसार पर जोर दिया।
अनुसंधान किसानों तक पहुंचाने पर बल
मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क के जरिए अनुसंधान और नई तकनीकों को तेजी से किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग और आईसीएआर के बीच हुए एमओयू से अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को नई मजबूती मिलेगी।
विज्ञान आधारित खेती से विकसित भारत का लक्ष्य
कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्र में हुई प्रगति सरकार की किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वहीं, कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि खाद्य संकट से आत्मनिर्भरता तक की भारत की यात्रा वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने प्राकृतिक खेती, विज्ञान आधारित अनुसंधान और किसान-केंद्रित नवाचारों को समय की आवश्यकता बताया।
नई तकनीकों को बढ़ावा देने की जरूरत
राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि विकसित भारत@2047 का लक्ष्य विज्ञान आधारित कृषि और आधुनिक तकनीकों से ही हासिल किया जा सकता है। उन्होंने सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, कृत्रिम गर्भाधान, भ्रूण प्रत्यारोपण, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई और नैनो उर्वरकों जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
1.70 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित
कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान फसल, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि से लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य सृजित हुआ। इसमें कृषि अनुसंधान का अनुमानित योगदान 55,000 करोड़ रुपए रहा। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियां सीधे लगभग एक करोड़ किसानों तक और मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक किसानों तक पहुंचीं।
नई किस्मों, तकनीकों और प्रकाशनों का विमोचन
स्थापना दिवस समारोह में 43 उन्नत फसल किस्मों, 17 उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें जलवायु-अनुकूल धान की किस्में, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकी स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन रोग एटलस और लघु किसानों के लिए किफायती कसावा हार्वेस्टर शामिल हैं।
51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 एमओयू पर हस्ताक्षर
कार्यक्रम के दौरान 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देकर उनकी सेवाओं का नियमितीकरण किया गया। साथ ही आईसीएआर ने 51 उद्योग साझेदारों के साथ 72 एमओयू पर हस्ताक्षर किए, ताकि विकसित प्रौद्योगिकियों का व्यावसायीकरण और किसानों तक उनका तेजी से हस्तांतरण सुनिश्चित किया जा सके।