पूर्वोत्तर भारत में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को नई गति देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में गुरुवार को केंद्र सरकार, असम और नागालैंड के बीच असम-नागालैंड सीमा क्षेत्र में खनिज तेल संचालन को सुविधाजनक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत दोनों राज्यों के सीमा क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज, उत्पादन और खनन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो भी मौजूद रहे।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस मौके पर कहा कि यह समझौता पूर्वोत्तर भारत में ऊर्जा, निवेश और समृद्धि का नया आर्थिक कॉरिडोर खोलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘समृद्ध पूर्वोत्तर’ के विजन को साकार करने में यह बड़ा कदम साबित होगा।
उन्होंने बताया कि नागालैंड में तेल, गैस और अन्य खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं, जिनके दोहन से भारत की विदेशी तेल और गैस स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। फिलहाल यहां 1000 से 1500 बैरल प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है, जिसे इस समझौते के बाद दस गुना तक बढ़ाने की संभावना है।
अमित शाह ने कहा कि यह समझौता सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का बेहतरीन उदाहरण है, क्योंकि दोनों राज्यों ने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए आपसी सहयोग से रास्ता निकाला है। उन्होंने यह भी कहा कि अब सिर्फ छह चिन्हित क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय नागालैंड के अन्य हिस्सों में भी तेल खोज का रास्ता खुल गया है।
पूर्वोत्तर में शांति और विकास का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने इस क्षेत्र को विकास एजेंडा के केंद्र में रखा है। वर्ष 2019 से अब तक 12 शांति समझौते किए गए हैं, जिनकी वजह से हिंसा में करीब 80 प्रतिशत तक कमी आई है।
उन्होंने जानकारी दी कि पूर्वोत्तर का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अब Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) से मुक्त हो चुका है और अगले साल तक पूरे क्षेत्र से AFSPA हटाने का लक्ष्य है।
गृह मंत्री ने कहा कि अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच जारी वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी हो गई है। ऐसे में यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई ताकत देगा।
केंद्र सरकार के अनुसार यह MoU सीमा क्षेत्र में तेल और गैस परियोजनाओं के लिए स्थिर, सुरक्षित और निवेश-अनुकूल माहौल तैयार करेगा। इससे न केवल हाइड्रोकार्बन सेक्टर में निवेश बढ़ेगा बल्कि पूर्वोत्तर भारत में रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।