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अमेरिका ने पेटेंट वाली दवाओं पर लगाया 100 प्रतिशत टैरिफ

03 अप्रैल, 2026 03:01 PM

संयुक्त राज्य अमेरिका आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता को कारण बताया है। जारी घोषणा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दवाइयां और उनसे जुड़े घटक “इतनी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका में आयात किए जा रहे हैं कि वे संयुक्त राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।”

यह घोषणा पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) को निशाना बनाती है। ये नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि विदेशी उत्पादन पर निर्भरता भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान “जीवन रक्षक दवाओं” की उपलब्धता को बाधित कर सकती है।

आदेश के तहत, अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत का मूल्य-आधारित (एड वैलोरेम) शुल्क लगाया जाएगा। जो कंपनियां उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी, उन्हें 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। घोषणा में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के लिए अलग-अलग शुल्क दरों का भी उल्लेख है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा, जबकि अनाथ दवाएँ, परमाणु दवाएँ और जीन थेरेपी जैसी कुछ विशेष श्रेणियाँ इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।

फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। घोषणा में कहा गया, “जेनेरिक दवाएँ और उनसे जुड़े घटक… इस समय शुल्क के अधीन नहीं होंगे।”

अधिकारियों ने बताया कि यह नीति घरेलू दवा निर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ध्यान केवल शुल्क पर नहीं बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर भी है। उन्होंने कहा, “मुद्दा सिर्फ शुल्क दर का नहीं है बल्कि उन समझौतों का है जो हम देशों और कंपनियों के साथ कर रहे हैं ताकि आपूर्ति शृंखलाएँ सुरक्षित रहें और उत्पादन अमेरिका में हो।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनियां पहले से ही इस नीति पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। उन्होंने अमेरिका में हो रहे निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा, “हम नए फार्मास्युटिकल संयंत्रों के निर्माण में ठोस प्रगति देख रहे हैं।” ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और कुछ कंपनियों को मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में छूट दी जाएगी।

इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन देशों पर जो तैयार दवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।

इस मामले में लागू किया गया ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन आयातों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस प्रावधान का पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क लगाने के लिए उपयोग किया गया था और अब इसे दवाओं तक बढ़ाना व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है

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