पालमपुर : पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति के बीच मुख्यमंत्री के नए कार्यालय के निर्माण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश आर्थिक दबाव से गुजर रहा है, ऐसे समय में मुख्यमंत्री कार्यालय पर करोड़ों रुपए खर्च करना उचित नहीं है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नए अलर्जली फेस-2 भवन में मुख्यमंत्री कार्यालय समेत अन्य अधिकारियों के कार्यालय बनाए गए हैं और इसकी लागत करीब 20 करोड़ रुपए बताई गई है। शांता कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री को आर्थिक संकट के दौर में स्वयं मितव्ययिता का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1977 में उन्होंने खर्चों में कटौती की शुरूआत स्वयं से की थी और प्रशासनिक फिजूलखर्ची रोककर बचत का प्रयास किया था। उनका दावा है कि उस समय हुई बचत को पेयजल व्यवस्था पर खर्च किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रत्येक विभाग में खर्चों की प्राथमिकता तय होनी चाहिए। शांता कुमार ने केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला परिसर का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि परिसर के लिए राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित राशि उपलब्ध न होने से निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने सरकार से अनावश्यक खर्चों से बचकर जनता की जरूरतों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। नए कार्यालय को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि यह किसी व्यक्ति का निजी स्थान नहीं, बल्कि संस्थागत कार्यालय है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में आने वाले मुख्यमंत्री भी करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि नए भवन में करीब 40 वाहनों की पार्किंग की सुविधा है और इससे सचिवालय के बाहर यातायात संबंधी समस्या कम होगी।