शिमला : हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू) शिमला में रविवार को तीसरा दीक्षांत समारोह मनाया गया। इस गरिमामय समारोह में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बतौर मुख्यातिथि और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने विशेष वक्ता के रूप में शिरकत की। समारोह में कानून के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान की गईं, साथ ही न्यायपालिका की तीन शीर्ष हस्तियों को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना सहित तीन को डॉक्टर ऑफ लॉ की उपाधि
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया। वहीं, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने स्नातक विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। इस दीक्षांत समारोह प्रमुख आकर्षण डॉक्टर ऑफ लॉ (मानद उपाधि) का वितरण रहा। यह सर्वोच्च सम्मान भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएस रामचंद्र राव और झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति त्रिलोक सिंह चौहान को प्रदान किया गया।
कमजोर वर्ग तक न्याय पहुंचाना ही वास्तविक न्याय : मुख्यमंत्री
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में न्याय का वास्तविक अर्थ केवल न्यायिक आदेशों तक सीमित नहीं है। यह निष्पक्षता, विवेकशीलता और समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक न्याय की उम्मीद जगाने से जुड़ा है। उन्होंने प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने शासन की अहम जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि जनहितकारी योजनाओं और न्यायिक निर्णयों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और खेल मैदानों के सांझा उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
विधि स्नातक समाज के इंजीनियर और डॉक्टर हैं : न्यायमूर्ति सुंदरेश
अपने विशेष संबोधन में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश ने विधि स्नातकों को सोशल इंजीनियर, सोशल डॉक्टर और सोशल आर्किटैक्ट की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि कानून के प्रति सम्मान केवल सैद्धांतिक और किताबी समझ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता और न्याय की भावना झलकनी चाहिए। न्यायमूर्ति सुंदरेश ने युवा वकीलों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती नई तकनीकों को अपनाने और कानूनी क्षेत्र की आधुनिक चुनौतियों के लिए खुद को तैयार रखने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. प्रीति सक्सेना, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों सहित कई अन्य गण्यमान्य व्यक्ति और विद्यार्थियों के अभिभावक उपस्थित रहे।