शिमला : हिमाचल प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने 'दूध प्रोत्साहन योजना' के तहत दुग्ध उत्पादकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को 3 रुपए से बढ़ाकर 6 रुपए प्रति लीटर करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस फैसले से प्रदेश के हजारों पशुपालकों की आय में सीधा इजाफा होगा।
सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर होगी राशि
सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, इस संशोधित योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की पात्र गैर-सरकारी (निजी) डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े दूध उत्पादकों को आर्थिक संबल प्रदान करना है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इस योजना में पूरी पारदर्शिता रहे, इसलिए यह वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इस योजना को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करने के लिए राज्य सरकार ने 14 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है।
निजी डेयरी से जुड़े किसानों की असमानता होगी दूर
गौरतलब है कि प्रदेश में निजी डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े कई छोटे व सीमांत किसान वित्तीय संसाधनों के अभाव में सरकारी लाभों से वंचित रह जाते थे। इसी असमानता को दूर करने के लिए सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी। अब प्रोत्साहन राशि को दोगुना किए जाने से इन किसानों को डेयरी फार्मिंग को अपनी आजीविका के एक स्थायी और लाभकारी साधन के रूप में अपनाने में बड़ी मदद मिलेगी।
आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में मजबूत कदम : मुख्यमंत्री
इस अहम फैसले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। कृषि व पशुपालन के माध्यम से आजीविका के स्थायी अवसर सृजित करके ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दूध प्रोत्साहन राशि में यह वृद्धि किसानों से किए गए वायदों को पूरा करने तथा एक मजबूत, आत्मनिर्भर व समृद्ध हिमाचल के निर्माण की दिशा में सरकार का एक ठोस कदम है।