चंडीगढ़ : हरियाणा में सरकारी भवनों की छतों पर सोलर पैनल लगाने की योजना से पहले ही सरकारी रिकॉर्ड की खामियां सामने आ गई हैं। प्रदेश के 87 शहरी स्थानीय निकायों से भवनवार जानकारी मांगी गई थी, लेकिन 38 निकायों ने अभी तक रिपोर्ट नहीं भेजी है। वहीं, 49 निकायों से मिली रिपोर्ट की जांच में 33 भवनों की जीपीएस लोकेशन गलत पाई गई है। अकेले पंचकूला के 32 भवनों की लोकेशन में गड़बड़ी सामने आई है।
अब तक 263 सरकारी भवनों का सर्वे पूरा हुआ है। इनमें कुल 92,328 वर्गमीटर रूफटॉप क्षेत्र दर्ज किया गया है, जिसमें 70,949 वर्गमीटर जगह सोलर पैनल लगाने के लिए उपयोगी मिली। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इन छतों पर 889.4 किलोवाट यानी करीब 0.89 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा सकती है।
पंचकूला के बाद मानेसर और सोहना में भी खामियां
जीपीएस लोकेशन में गड़बड़ी केवल पंचकूला तक सीमित नहीं है। मानेसर में 21, सोहना में 14 और रादौर में 11 भवनों की लोकेशन गलत दर्ज मिली है। महेंद्रगढ़, कनीना, बावल, हिसार और सिरसा समेत अन्य निकायों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। सोलर प्लांट की स्थापना से पहले भवन की वास्तविक साइट का सत्यापन जरूरी है। ऐसे में गलत जीपीएस रिकॉर्ड के कारण साइट वेरिफिकेशन और आगे की स्थापना प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए अब भवनों की लोकेशन समेत सर्वे डेटा को दुरुस्त करना अहम होगा।
छत के साथ बिजली खपत का भी हो रहा आकलन
सरकार केवल छत का क्षेत्रफल जुटाकर सोलर क्षमता तय नहीं कर रही। भवनवार सर्वे में सोलर के लिए उपलब्ध जगह, स्वीकृत बिजली लोड और सालाना बिजली खपत का ब्योरा भी लिया जा रहा है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर प्रत्येक भवन के लिए संभावित सोलर क्षमता तय की जाएगी। उपलब्ध आंकड़े अभी पूरे प्रदेश की तस्वीर नहीं हैं। 38 निकायों की रिपोर्ट मिलने के बाद भवनों की संख्या और संभावित सौर क्षमता में बढ़ोतरी हो सकती है।
कई सरकारी भवनों पर पहले से लगे हैं सिस्टम
सर्वे में यह भी सामने आया है कि कुछ सरकारी भवन पहले ही सौर ऊर्जा से जुड़े हैं। बराड़ा नगर समिति कार्यालय और कुछ सामुदायिक केंद्रों पर सोलर सिस्टम लगे हैं। नारायणगढ़ नगर समिति कार्यालय और कम्युनिटी हॉल भी सोलर से जुड़े हैं। पंचकूला के कुछ भवनों पर भी संयंत्र स्थापित हैं, जबकि कई भवनों में स्थापना बाकी है। महेंद्रगढ़ और अटेली मंडी के कुछ सरकारी भवनों पर अभी सोलर संयंत्र नहीं लगे हैं। इससे स्पष्ट है कि नए सिस्टम लगाने से पहले मौजूदा संयंत्रों और भवनों की स्थिति को भी रिकॉर्ड में शामिल करना होगा।
रेस्को और कैपेक्स मॉडल से होगी स्थापना
हरियाणा के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग ने सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर के लिए रेस्को और कैपेक्स मॉडल रखे हैं। डेवलपर चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। सरकारी कार्यालयों के बाद सरकारी आवासों को भी योजना में शामिल करने की तैयारी है। चंडीगढ़ स्थित हरियाणा सरकार के कर्मचारियों के सरकारी आवासों में रूफटॉप सोलर लगाने के लिए विकल्प और अंडरटेकिंग भी मांगी गई है।
38 निकायों की रिपोर्ट के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल योजना के सामने सबसे बड़ी जरूरत सटीक डेटा तैयार करने की है। 87 निकायों में से 38 की रिपोर्ट आना बाकी है और उपलब्ध रिपोर्टों में भी जीपीएस संबंधी खामियां मिली हैं। लंबित रिपोर्ट आने और रिकॉर्ड दुरुस्त होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि प्रदेश की सरकारी इमारतों की छतों पर कुल कितनी सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा सकती है।