चंडीगढ़ : हरियाणा के राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत हजारों प्राध्यापकों के लिए सरकार ने करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत पदोन्नति की प्रक्रिया आसान कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी कॉलेजों में अनिवार्य सेवा से जुड़ी शर्त में एक वर्ष की छूट प्रदान की है। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी पदोन्नति केवल ग्रामीण सेवा की निर्धारित अवधि पूरी नहीं होने के कारण लंबित थी।
उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को भेज दिए गए हैं। प्राचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि संशोधित व्यवस्था के तहत पात्र शिक्षकों के पदोन्नति संबंधी मामलों को तत्काल तैयार कर निदेशालय को भेजा जाए।
लंबित सीएएस मामलों को मिलेगी गति
करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत शिक्षकों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता पूरी करने पर उच्च पद अथवा अगले वेतनमान का लाभ दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरकारी कॉलेजों में सेवा की शर्त भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही है। निर्धारित अवधि की ग्रामीण सेवा पूरी नहीं होने के कारण कई पात्र शिक्षकों के सीएएस केस आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।
सरकार द्वारा अब एक वर्ष की छूट दिए जाने से ऐसे मामलों के निस्तारण का रास्ता खुल गया है। इससे पात्र शिक्षकों को पदोन्नति के साथ-साथ उससे जुड़े वित्तीय लाभ भी समय पर मिलने की संभावना है।
तबादला न होने से अटक रहे थे प्रमोशन
शिक्षकों के अनुसार, कई मामलों में ग्रामीण क्षेत्र में निर्धारित सेवा पूरी करने की इच्छा के बावजूद प्रशासनिक कारणों से तबादला नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप संबंधित शिक्षक सीएएस के तहत पदोन्नति के लिए अन्य पात्रताएं पूरी करने के बावजूद ग्रामीण सेवा की शर्त के कारण लाभ से वंचित रह गए।
अब सरकार ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण सेवा की अनिवार्य शर्त में एक साल की राहत दी है। इससे विशेष रूप से उन शिक्षकों को लाभ मिलेगा, जिनके पदोन्नति प्रकरण इस एक शर्त के कारण लंबित थे।
प्राचार्यों को तुरंत केस भेजने के निर्देश
विभागीय आदेश के बाद अब राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें पात्र शिक्षकों के मामलों की जांच कर आवश्यक दस्तावेज पूरे करने और केस निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इससे लंबे समय से लंबित सीएएस प्रकरणों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वित्तीय लाभ और एरियर का भी रास्ता खुलेगा
सीएएस के तहत पदोन्नति मिलने से शिक्षकों को उच्च वेतनमान के साथ वित्तीय लाभ प्राप्त होते हैं। जिन शिक्षकों के मामले लंबे समय से लंबित हैं, उनके लिए पदोन्नति के साथ संभावित एरियर का भुगतान भी महत्वपूर्ण होगा। ग्रामीण सेवा की शर्त में दी गई एक वर्ष की छूट से ऐसे मामलों को निपटाने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। विभाग के इस निर्णय को राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, जिनकी पदोन्नति प्रक्रिया ग्रामीण सेवा की शर्त के कारण अटकी हुई थी।