चण्डीगढ़ : राष्ट्रीय कवि संगम, चंडीगढ़ की ओर से ‘वंदे मातरम् कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम और वीरता की भावनाओं से ओतप्रोत कविताओं ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर 51 रचनाकारों को तिरंगा पटका एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गुरबख्श रावत, पार्षद, वार्ड-27, चंडीगढ़ उपस्थित रहीं। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में विनोद बंसल, समाजसेवी एवं ट्रस्टी, राष्ट्रीय कवि संगम, चंडीगढ़ ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेम विज, अध्यक्ष, संवाद साहित्य मंच ने की। विशिष्ट अतिथियों में श्री रमेश मित्तल, शिक्षण व्यवस्था, राष्ट्रीय कवि संगम तथा डॉ. विनोद कुमार शर्मा, अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, पंचकूला इकाई शामिल रहे। सामान्य अतिथि के रूप में डॉ. पवन जैन ‘प्रबल’ उपस्थित रहे। इस अवसर पर उनकी पुस्तक ‘कुछ पल तुम्हारे चाहिए’ का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय कवि संगम, चंडीगढ़ की अध्यक्ष डॉ. संतोष गर्ग द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन महासचिव अनिल शर्मा ‘चिंतक’ ने प्रभावशाली ढंग से किया।
कवि सम्मेलन में देश के गौरव, वीरों के बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को अभिव्यक्त करती रचनाओं ने वातावरण को देशभक्ति से भर दिया। सुरेन्द्र पाल सोनी ‘काकड़ौद’ ने कहा—भारत के गौरव की गाथा याद रहे, वीरों का ऊँचा सिर-माथा याद रहे। कीर्ति सोनी ‘काकड़ौद’ ने शांति और युद्ध के संदर्भ में अपनी भावपूर्ण पंक्तियां प्रस्तुत करते हुए कहा—यदि देश की आन पे आए, तभी युद्ध ज़रूरी है, मगर शांति की खातिर, दुनिया को बुद्ध ज़रूरी है।
प्रेम राविश ने युवाओं में वीरता और राष्ट्रप्रेम की भावना जगाते हुए कहा—तुम्हारी नसों में वही ज्वाला जलनी चाहिए,जो जलाई थी कभी वीरों ने, वही फलनी चाहिए। राशि श्रीवास्तव ने कहा—सर पे बांधे कफ़न हम दीवाने चले, आजाद हिंदोस्तां को कराने चले। वहीं पवन शर्मा ‘मुसाफ़िर’ ने राष्ट्र के प्रति निष्ठा का संदेश देते हुए कहा—पर भारत मां का ही खाके अन्न, जिसमें कण भर सत्कार न हो,उनसे कह दो भारत छोड़ें,जिनको भारत से प्यार न हो। इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने अपनी देशभक्ति रचना ‘देश की माटी’ प्रस्तुत करते हुए कहा— मेरा देश है बड़ा प्यारा,प्रकृति का सुंदर नजारा, पेड़-पौधे वनस्पतियों से भरा, अलग-अलग रूपों में इसकी धरा। रंजन मगोत्रा ने ओजपूर्ण रचना के माध्यम से युवाओं में राष्ट्ररक्षा और देश के प्रति समर्पण की भावना जगाते हुए कहा—जब-जब देश पर विपदा के घन आए, सोए हुए नौजवानों, जागना ज़रूर जी। कृष्णा गोयल ने कहा- तुम देश के मान को कर तार तार गये
तुम्हीं कहो तुम जीत गये या हार गयें? कवि सम्मेलन में उपस्थित सभी रचनाकारों ने अपनी-अपनी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से देश की एकता, अखंडता, वीर शहीदों के बलिदान और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र के प्रति समर्पण और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना जागृत करने के संकल्प के साथ हुआ। कवि सम्मेलन में अनिल चिंतक, संतोष गर्ग, डॉ. अनीश गर्ग, रंजन मंगोत्रा, सोमेश गुप्त, एम.एल. अरोड़ा, नीलम नारंग, बिजेंद्र चौहान, गौरव शर्मा, गणेश दत्त, सुनीता नैन, राशि श्रीवास्तव, प्रभात पाण्डेय, राजेश भाटिया, पवन मुसाफिर, दर्शना सुभाष पाहवा, कीर्ति सोनी काकड़ौद, सुरेन्द्र पाल सोनी काकड़ौद, सर्वेश ‘शायर’, सागर सिंह भूरिया (हिमाचल प्रदेश), मिक्की पासी, प्रियंका बिश्नोई, सुनीता सिंह, कृष्णा गोयल, रेखा मित्तल, डॉ. पवन जैन, अरविंद जी (चरखी दादरी) तथा जितेन्द्र जी (चरखी दादरी) ने काव्य पाठ किया।