मुंबई : बॉलीवुड के जानेमाने चरित्र अभिनेता और निर्देशक सौरभ शुक्ला का कहना है कि नाटक जब खुली किताब पर फिल्म बनाने का विचार उनके मन में पहले से था। कभी-कभी किसी कहानी की मंजिल कैमरा शुरू होने से पहले ही तय हो जाती है। जब खुली किताब की यात्रा भी ऐसी ही है। इसकी शुरुआत थिएटर के मंच से हुई थी और अब यह फिल्म के रूप में दर्शकों के सामने आ रही है। इस फिल्म को सौरभ शुक्ला ने लिखा है और इसका निर्देशन भी उन्होंने ही किया है। फिल्म का निर्माण अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट ने शूस्ट्रिंग फि़ल्म प्रोडक्शन के साथ मिलकर किया है। यह फिल्म आज ज़ी5 पर रिलीज़ हुई है। इस फिल्म की खास बात यह है कि यह सौरभ शुक्ला के इसी नाम के मशहूर नाटक पर आधारित है।
यह नाटक पहले आद्यम नाम की थिएटर पहल के तहत मंच पर प्रस्तुत किया गया था, जो आदित्य बिड़ला समूह की पहल है। नाटक की मजबूत कहानी, हास्य और भावनाओं ने अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्होंने इस कहानी को फिल्म के रूप में बनाने का फैसला किया। सौरभ शुक्ला ने कहा,इस नाटक को फिल्म बनाने का विचार उनके मन में पहले से था। जब समीर मेरे पास आए और बोले कि वे इसे फिल्म बनाना चाहते हैं, तो मुझे मनाने की ज़रूरत नहीं पड़ी। जब मैं इसे लिख रहा था, तब भी मैं इसे फिल्म की तरह ही सोच रहा था। नाटक इसका एक रूप था, लेकिन मुझे लगता था कि यह कहानी फिल्म भी बन सकती है। अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट के निदेशक समीर नायर ने कहा कि हम हमेशा ऐसी कहानियों को आगे बढ़ाना चाहते हैं जो खत्म होने के बाद भी लोगों के मन में रह जाएं। ‘जब खुली किताब’ में हमें वही बात महसूस हुई। हमें इसकी कहानी, किरदार और भावनाओं पर भरोसा था। इसलिए इसे मंच से फिल्म तक लाना हमें बिल्कुल स्वाभाविक लगा। अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत और शूस्ट्रिंग फि़ल्म प्रोडक्शन द्वारा निर्मित जब खुली किताब दिखाती है कि अच्छी कहानियां माध्यम बदलने से नहीं बदलतीं, वे बस लोगों तक पहुंचने का नया तरीका ढूंढ लेती हैं।