शिमला : हिमाचल प्रदेश में कॉन्ट्रैक्ट कैरेज वाहनों (टैक्सी आदि) को लेकर राज्य सरकार ने वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश में अब कॉन्ट्रैक्ट कैरेज वाहनों को 12 की बजाय 15 वर्ष तक चलाने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक इस मामले में केंद्र सरकार का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक 12 से 15 वर्ष की अवधि वाले कॉन्ट्रैक्ट कैरेज वाहनों के चालान नहीं काटे जाएंगे। यह बात उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने राज्य विधानसभा में एक वक्तव्य के दौरान कही।
केंद्र से उठाया गया है परमिट फीस घटाने का मामला
सदन में उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 की धारा 59 के तहत वाहनों की आयु सीमा तय करने का एकाधिकार केंद्र सरकार के पास है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने अपने क्षेत्राधिकार का उपयोग करते हुए वाहन मालिकों के हित में यह फौरी राहत दी है। उन्होंने बताया कि हिमाचल सरकार की पैरवी के बाद ही केंद्र ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की अवधि 15 वर्ष की थी। इसी तर्ज पर अब कॉन्ट्रैक्ट कैरेज वाहनों के लिए भी केंद्र से पत्राचार किया गया है। इसके अलावा परमिट फीस को 20 हजार रुपए से घटाने का मामला भी केंद्र के समक्ष मजबूती से उठाया गया है। डेटा के अनुसार 1 अप्रैल से अब तक 1,009 ऑप्रेटर ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं।
एटीएस की कमी, मैनुअल पासिंग की मांग
प्रदेश में वाहनों की फिटनेस जांच के लिए ऑटोमेटेड टैस्टिंग स्टेशनों की भारी कमी से ऑप्रेटरों को हो रही परेशानी को भी सरकार ने स्वीकार किया है। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि जब तक प्रदेश में एटीएस का पर्याप्त नैटवर्क तैयार नहीं हो जाता, तब तक पुरानी मैनुअल फिटनैस जांच व्यवस्था को ही जारी रखने की अनुमति दी जाए।
टैक्सी ऑप्रेटरों के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
इस मुद्दे पर सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपनी हर नाकामी का दोष केंद्र पर मढ़कर जिम्मेदारी से बचना चाहती है। जयराम ने बारिश के बीच धरने पर बैठे टैक्सी ऑप्रेटरों को जबरन उठाए जाने का कड़ा विरोध किया और एटीएस की कमी से वाहन मालिकों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऑप्रेटरों के साथ खड़ी है। उन्होंने जयराम ठाकुर की टिप्पणियों को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि जो फैसले केंद्र के अधिकार क्षेत्र (मोटर व्हीकल्स एक्ट) में आते हैं, उनके लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराना राजनीति से प्रेरित है।