राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला आने के बाद से अयोध्या और यहां का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट क्षेत्र देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। 15 सदस्यीय ट्रस्ट में कई लोग बुजुर्ग होने से बीमार चल रहे हैं। हालत यह है कि अयोध्या का इस समय कोई भी ट्रस्ट में नहीं है। ऐसे में नए नामों का जुड़ना और ट्रस्ट के विस्तार की पूरी संभावना है। ट्रस्ट कार्यकारिणी की छह जुलाई को प्रस्तावित बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। बड़ा सवाल है कि बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉक्टर अनिल मिश्र का क्या होगा?
चंपत राय और अनिल मिश्रा को बुलाकर पक्ष सुना जाएगा या दोनों लिखित रूप में अपना पक्ष रखेंगे। इन दोनों का पक्ष जानने के बाद ट्रस्टी सर्व सम्मति से कोई फैसला ले पाएंगे? यदि दोनों ट्रस्टियों का इस्तीफा मंजूर कर लिया जाएगा तो फिर आगे दायित्व के लिए नये सदस्यों में किसको जोड़ा जाएगा। इस कार्यवाही से पहले कार्यवाहक के रूप में दायित्व कौन संभालेगा। यही कुछ सवाल सबसे ज्यादा मंथन में है।
दरअसल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वायत्तशासी संस्था है जो आयकर अधिनियम के 80 जी के अन्तर्गत पंजीकृत हैं। इस संस्था के प्रावधानों के अनुसार सदस्यता बढ़ाने का भी प्रावधान है। इस प्रावधान के अन्तर्गत ट्रस्ट में नये सदस्यों को जोड़ा जा सकता है। इसके लिए कार्यकारिणी को अधिकार है। यह जरूरी भी हो गया है क्योंकि 15 सदस्यीय कार्यकारिणी में ही दिवंगत अयोध्या नरेश विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र का स्थान अब तक रिक्त हैं। उनके स्थान की ही पूर्ति के लिए एक अतिरिक्त स्थाई सदस्य नामित किया जाना है। इस बीच दो स्थाई सदस्यों चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है।
अयोध्या का प्रतिनिधित्व नहीं
खास बात यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के चार पदेन सदस्यों को छोड़कर तीन स्थाई सदस्य उत्तर प्रदेश के है। इसके अलावा छह सदस्य दूसरे प्रांतों के निवासी हैं। इस लिहाज से अयोध्या का प्रतिनिधित्व नहीं रह गया है। फिलहाल बीते घटनाक्रम को देखते हुए कार्यकारिणी की आपात बैठक बुलाई जा सकती थी लेकिन ट्रस्ट के ही आग्रह पर एसआईटी जांच चल रही है। ऐसे में छानबीन अधूरी है। कई तथ्य आने बाकी है तो बैठक में अधूरे तथ्य की जानकारी कार्यकारिणी के सदस्यों को कैसे दी जाती।
इसके अलावा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक हर चौथे माह में होती आ रही है। पिछले मार्च में बैठक के बाद छह जुलाई की बैठक पहले से प्रस्तावित है। इस दशा में आपात बैठक के बजाय रुटीन बैठक में वर्तमान घटनाक्रम की चर्चा होगी। तब तक छूटे तथ्यों से भी हो सकता है कि पर्दा हट जाए।
फिलहाल राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सहित चार वयोवृद्ध सदस्यों सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम अधिवक्ता केशव पारासरन (92 वर्ष), जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती (90 वर्ष), युगपुरुष स्वामी परमानंद (90 वर्ष) अस्वस्थ चल रहे हैं।
चेक पर हस्ताक्षर का अधिकारी डॉ. अनिल के पास था
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी व जगद्गुरु माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ की हमेशा से ही सीमित भूमिका रही है। वहीं ट्रस्ट कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि की भी भूमिका समय-समय पर ही रही है लेकिन वह भी सीमित ही थी। देश भर में होने वाली रामकथा के अलावा उनके अनुयायियों के कार्यक्रमों से उन्हें फुर्सत नहीं मिल पाती है। ऐसे में चेक पर हस्ताक्षर का अधिकार उन्होंने ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र को सौंप रखा था।
इसी तरह कामेश्वर चौपाल व अयोध्या नरेश विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र की भूमिकाएं निर्धारित थीं। अब यह दोनों दिवंगत हो गये है। इसमें कामेश्वर चौपाल की जगह पर भारतीय वन सेवा के अधिकारी कृष्ण मोहन को चुना गया है लेकिन चढ़ावे के प्रकरण में एफआईआर को देखें तो उनकी अब तक की कोई उपलब्धि नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर निर्मोही अखाड़ा महंत दिनेंद्र दास को ट्रस्ट में स्थान दिया गया है लेकिन उन्हें किसी भूमिका में शामिल ही नहीं किया गया है।