समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपए के गबन के आरोप लगाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत सरकार और पार्टी संगठन ने सोमवार को इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह राम मंदिर को लेकर अफवाह फैलाकर झूठ गढ़ने का असफल प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आंतरिक लेखा-परीक्षा (ऑडिट) का उल्लेख करते हुए कहा कि मामले की जांच की जा रही है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
'चंदा और जमीन के बाद अब चढ़ावे में भी चोरी'
इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सदस्य और उत्तर प्रदेश मामलों के प्रभारी संजय सिंह ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा अब भगवान के चढ़ावे को भी नहीं बख्श रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रविवार को दावा किया था कि अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में आए करोड़ों रुपए गायब हो गए हैं। संजय सिंह ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया कि प्रभु श्रीराम के नाम पर चंदा चोरी और जमीन घोटालों के बाद अब दानपात्र के चढ़ावे में भी लगभग 7 करोड़ रुपए की बड़ी चोरी का मामला सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला, गैस, बिजली, स्कूल, अस्पताल और मध्याह्न भोजन का पैसा खाने वाली भाजपा अब भगवान के चढ़ावे को भी नहीं बख्श रही है।
'मामले की जांच जारी, दोषी को बख्शेंगे नहीं'
झांसी दौरे पर पहुंचे पंकज चौधरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह सरकार का नहीं, बल्कि ट्रस्ट का विषय है। चौधरी ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मंदिर के नाम पर यदि किसी प्रकार की चोरी या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। बाद में एक कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान चौधरी ने दोहराया कि सपा अध्यक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच ट्रस्ट अपने स्तर पर कर रहा है तथा चढ़ावे से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
डिप्टी सीएम बोले- 'अखिलेश की सोच बाबरवादी'
उल्लेखनीय है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने रविवार को कहा था कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता रहता है। इस प्रक्रिया में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। ऑडिट की प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है। फिलहाल भी यही प्रक्रिया जारी है और अभी तक कोई विशेष अनियमितता सामने नहीं आई है।" इस बीच, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कभी उच्चतम न्यायालय के निर्णय का सम्मान नहीं किया। उनकी सोच बाबरवादी है।
'सनातन विरोधी सोच का भुगतना होगा राजनीतिक अंजाम'
पाठक ने कहा कि श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक आपने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। अब राम मंदिर को लेकर अफवाह फैलाकर झूठ गढ़ने का असफल प्रयास किया जा रहा है। पाठक ने चेतावनी देते हुए कहा कि भारत सनातन संस्कृति का वाहक राष्ट्र है। सनातन संस्कृति के विरुद्ध सोच रखने का राजनीतिक परिणाम समाजवादी पार्टी को भुगतना पड़ेगा।
आस्था का मामला, सरकार केवल बचाव न करे बल्कि जांच कराए
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ेगा। वहीं, बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि राम मंदिर निर्माण और रखरखाव से जुड़ी चिंताओं की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। पुनिया ने कहा कि राम मंदिर केवल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के हिंदुओं की आस्था का विषय है। यदि निर्माण या रखरखाव को लेकर कोई सवाल उठ रहे हैं तो सरकार को उनका समाधान करना चाहिए, न कि केवल बचाव करना चाहिए।
अखिलेश ने शेयर की खबर, SP का सवाल- 'मामले पर ट्रस्ट चुप क्यों?'
इस बीच, अखिलेश यादव ने सोमवार को 'एक्स' पर एक समाचार की तस्वीर साझा की, जिसमें दावा किया गया था कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र में गबन, 4 संदिग्ध दबोचे, सीसीटीवी से खुला राज। हालांकि, अयोध्या से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने 4-5 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने संबंधी ऐसी किसी सूचना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सपा प्रवक्ता एवं अयोध्या के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय ने एक बयान में कहा कि ट्रस्ट इस मामले पर चुप क्यों है? यदि कोई अनियमितता नहीं हुई है तो अब तक स्पष्ट प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई? उन्होंने दावा किया कि चढ़ावे के कथित गबन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो वह कब से चल रही थी।