रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि जो राष्ट्र अपनी जरूरतों को खुद पूरा करने में सक्षम होता है, वही अपने हितों की सुरक्षा के लिए सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। उन्होंने 19 जून को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ नागपुर स्थित ऑर्डनेंस फैक्ट्री अंबाझरी में यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) की अत्याधुनिक 10,000 टन एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस का भूमि पूजन किया।
उन्होंने कहा कि यह एक्सट्रूज़न प्रेस देश की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें भारत आयात पर निर्भर रहने के बजाय अब महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों का घरेलू उत्पादन कर रहा है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों पर आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है।
यह नई प्रेस देश की सबसे उन्नत सुविधाओं में शामिल होगी। इसके जरिए रक्षा प्रणालियों, एयरोस्पेस, विमानन संरचनाओं, मिसाइल कार्यक्रमों, रेलवे और परिवहन क्षेत्र के लिए बड़े और जटिल एल्यूमिनियम मिश्र धातु प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए ऐसे धातुओं की जरूरत होती है जो हल्के भी हों और बेहद मजबूत भी। यदि धातु की गुणवत्ता बेहतर होगी तो वह हर परिस्थिति में कारगर साबित होगी।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में भारत में बने उपकरणों की बड़ी भूमिका रही। ऐसे में रक्षा क्षेत्र में मजबूत हार्डवेयर निर्माण को बढ़ाना जरूरी है ताकि सेना की ताकत और बढ़ सके।
रक्षा मंत्री ने कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है, दुश्मन की पहचान कठिन हो रही है, लेकिन पारंपरिक युद्ध और उससे जुड़े साधनों की अहमियत अभी भी उतनी ही है जितनी 1947 में थी और 2047 में भी बनी रहेगी। ऐसे में मजबूत सैन्य-औद्योगिक ढांचे की आवश्यकता लंबे समय तक बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन को पूरा करने के लिए तकनीक, कुशल मानव संसाधन, ज्ञान और राष्ट्र पर विश्वास जैसे चार प्रमुख स्तंभों पर काम कर रही है।
रक्षा उत्पादन के आंकड़ों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 2014 में भारत का रक्षा उत्पादन जहां 46 हजार करोड़ रुपये था, वह अब बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
रक्षा निर्यात भी 2014 के 1,000 करोड़ रुपये से कम से बढ़कर अब 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि भारत अगले 2-3 वर्षों के लिए तय किए गए 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये रक्षा निर्यात के लक्ष्य को तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) का कॉरपोरेटाइजेशन बदलते समय और नई तकनीकों को देखते हुए किया गया था, ताकि संस्थाएं अधिक मजबूत और चुस्त बन सकें।
उन्होंने बताया कि कॉरपोरेटाइजेशन से पहले 2019-20 में ओएफबी का उत्पादन 12,755 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 2025-26 में 26,282 करोड़ रुपये हो गया है।
रक्षा निर्यात के क्षेत्र में भी यह आंकड़ा 81 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें वाईआईएल का योगदान 397 करोड़ रुपये है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और पूंजी निवेश किसी भी औद्योगिक इकाई को आगे बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक मशीनरी और नई तकनीकों में निवेश से उत्पादन प्रक्रिया तेज होती है, गुणवत्ता बेहतर होती है और संपूर्ण प्रणाली अधिक आधुनिक व प्रभावी बनती है।
इस मौके पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि दुनिया अब भारत के रक्षा क्षेत्र की प्रगति को पहचान रही है और भारत वैश्विक रक्षा बाजार में एक बड़े निर्यातक के रूप में उभर रहा है।
देवेंद्र फडणवीस ने ऑपरेशन सिंदूर को नए भारत की तकनीकी क्षमता का शानदार उदाहरण बताया और कहा कि यह परियोजना नागपुर समेत पूरे क्षेत्र को रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।