चंडीगढ़/दिल्ली : दिल्ली के सियासी गलियारों में आज पंजाब कांग्रेस के भविष्य को लेकर एक ऐसी बिसात बिछने जा रही है, जिस पर हर गुट की सांसें थमी हुई हैं। महज़ 4 दिनों के भीतर आज (2 जून) पार्टी हाईकमान की यह दूसरी हाई-लेवल मीटिंग है, जिसमें पंजाब प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद रहेंगे। यह बैठक सिर्फ आगामी चुनावों की रणनीति बनाने के लिए नहीं है, बल्कि यह पंजाब कांग्रेस के भीतर सुलग रही गुटबाजी, नेतृत्व परिवर्तन की अंदरूनी चाहत और वजूद को बचाए रखने की एक भावुक छटपटाहट की कहानी भी बयां करती है। पंजाब की सियासत हमेशा से जातियों और वर्गों के संतुलन पर टिकी रही है। वर्तमान में पंजाब कांग्रेस के प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष (LoP) प्रताप सिंह बाजवा, दोनों ही जट्ट सिख चेहरा हैं। कांग्रेस के भीतर एक बड़ा धड़ा इस बात से चिंतित और भावुक है कि अगर सभी बड़े पद एक ही वर्ग को दे दिए गए, तो अन्य वर्ग पार्टी से छिटक जाएंगे। इसी सोशल इंजीनियरिंग को साधने के लिए हिंदू चेहरे के रूप में पूर्व मंत्री विजय इंद्र सिंगला का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिन्हें हर गुट को साथ लेकर चलने वाला एक संतुलित नेता माना जाता है। वहीं, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी भले ही रेस में न दिखें, लेकिन पर्दे के पीछे 'किंगमेकर' की भूमिका में हैं। सुखजिंदर सिंह रंधावा, परगट सिंह और राणा गुरजीत सिंह की किस्मत का फैसला भी इसी बंद कमरे में होना है।
कांग्रेस की पुरानी रवायत रही है कि अगर संगठन की कमान जट्ट सिख के पास होगी, तो विपक्ष के नेता का पद किसी हिंदू या दलित चेहरे को मिलेगा। आम आदमी पार्टी और बीजेपी ने भी इसी फॉर्मूले को अपनाया है। चर्चाएं गर्म हैं कि यदि हाईकमान जट्ट सिख को ही प्रधान बनाए रखता है, तो प्रताप सिंह बाजवा की जगह नेता प्रतिपक्ष का पद बदला जा सकता है। इस स्थिति में दीनानगर की विधायक अरुणा चौधरी का नाम सबसे ऊपर है, जो दलित और महिला चेहरे के रूप में एक मजबूत विकल्प हैं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के बदलते सुर : दर्द, शिकायत और पुरानी यादें
इस बैठक के बीच सबसे ज्यादा चौंकाने वाली और सियासी गलियारों को भावुक करने वाली चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर है। साल 2021 में भारी मन से कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में गए कैप्टन के हालिया बयानों ने कांग्रेसियों के दिलों में उम्मीद की एक नई अलख जगा दी है। कैप्टन का यह दर्द छलक उठा कि "कांग्रेस में मुख्यमंत्री रहते हुए हमेशा मुझसे सलाह ली जाती थी, लेकिन बीजेपी आलाकमान बिना जमीनी नेताओं से पूछे फैसले थोप देता है।" इतना ही नहीं, राहुल गांधी द्वारा फोन कर शोक संवेदनाएं व्यक्त करने और जन्मदिन की बधाई देने की घटना ने पुरानी वफादारियों को फिर से हवा दे दी है। राजा वड़िंग भी यह कहकर जख्मों को हरा कर चुके हैं कि अगर कैप्टन पार्टी न छोड़ते तो 2022 का चुनाव कांग्रेस ही जीतती।
राहुल गांधी का अल्टीमेटम : 'टीम प्लेयर बनो, वरना रिजर्व बेंच पर बैठो'
कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी और संवेदनशील चुनौती नेताओं की आपसी कलह और व्यक्तिगत अहंकार को मिटाना है। राहुल गांधी पहले ही दो-टूक शब्दों में चेतावनी दे चुके हैं कि "टीम प्लेयर बनो, वरना रिजर्व में बैठना होगा।" चाहे कोई कितना भी बड़ा सूरमा क्यों न हो, एक अकेला खिलाड़ी मैच नहीं जिता सकता। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल भी सार्वजनिक बयानबाजी करने वालों को कड़ा सबक सिखाने की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि, प्रभारी भूपेश बघेल ने साफ किया है कि राजा वड़िंग को बदला नहीं जाएगा और 2027 का चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा, लेकिन आज की यह बैठक पंजाब कांग्रेस की तकदीर और तस्वीर दोनों तय करने वाली है।