भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 3 अगस्त के स्पष्ट आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अदालत ने सरकार को लंबित DA/DR की सभी किस्तें एक पखवाड़े के भीतर जारी करने तथा बकाया चुकाए जाने तक बड़े पैमाने पर प्रिंट और सोशल मीडिया विज्ञापन जैसे अनुत्पादक खर्च से बचने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों का हक देने के बजाय अपनी और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक ब्रांडिंग पर सरकारी खजाना खर्च करने में लगी हुई है।
चुघ ने कहा कि भगवंत मान की नालायकी और नौसिखियेपन ने पंजाब की आर्थिक स्थिति को बदहाल कर दिया है। सरकारी कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में सरकार की मुश्किलें सामने आती रहती हैं, पंजाब पर 4.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है और राज्य के संसाधनों पर भारी वित्तीय दबाव है। इसके बावजूद भगवंत मान सरकार पंजाब के सीमित संसाधनों को भगवंत मान, अरविंद केजरीवाल और उनकी पूरी राजनीतिक टोली की खातिरदारी, प्रचार और ऐशो-आराम पर खर्च करने में लगी हुई है।
चुघ ने कहा कि हाईकोर्ट के 3 अगस्त के आदेश के अनुसार पंजाब सरकार और PSPCL को कर्मचारियों तथा पेंशनरों की सभी लंबित DA/DR किस्तें केंद्रीय पैटर्न के अनुसार जारी करनी हैं। राज्य सरकार के अपने आंकड़ों के अनुसार लगभग 14,191 करोड़ रुपए की देनदारी है और इससे करीब 8 लाख कर्मचारी एवं पेंशनर प्रभावित हैं। अदालत ने भुगतान में देरी होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज का भी निर्देश दिया है।
चुघ ने कहा कि एक तरफ पंजाब का कर्मचारी और पेंशनर अपने वैध बकाए के लिए इंतजार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब सरकार का DIPR देशभर के 70 से अधिक अखबारों में विज्ञापन देने के लिए सरकारी धन खर्च कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय प्राथमिकताओं का सवाल नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के सम्मान का भी सवाल है, जिसने स्पष्ट रूप से बड़े पैमाने के विज्ञापन अभियानों को अनुत्पादक खर्च बताया है। चुघ ने कहा कि भगवंत मान सरकार की प्राथमिकताएं पंजाब की जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुकी हैं। कर्मचारियों और पेंशनरों के 14,191 करोड़ रुपए देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, लेकिन अरविंद केजरीवाल और AAP नेतृत्व की राजनीतिक ब्रांडिंग, विज्ञापन तथा ऐशो-आराम और VIP सुविधाओं पर खर्च करने के लिए खजाना खुला है। उन्होंने कहा कि जिस पैसे से पंजाब के कर्मचारियों का हक चुकाया जाना चाहिए, उसका इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार और नेताओं की ब्रांडिंग के लिए करना पंजाब के हर करदाता के साथ अन्याय है।
चुघ ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी बकाया नहीं चुकाए जाते, तब तक पंजाब सरकार बड़े पैमाने पर प्रिंट और सोशल मीडिया विज्ञापन अभियानों जैसे अनुत्पादक खर्च का सहारा न ले। अब मान सरकार को बताना चाहिए कि देशभर के 70 से अधिक अखबारों में विज्ञापन देने पर हो रहा खर्च न्यायालय के इस स्पष्ट आदेश के अनुरूप कैसे है। चुघ ने कहा कि 31 अगस्त 2026 तक पंजाब के मुख्य सचिव को अनुपालन हलफनामा दाखिल करना है। भगवंत मान सरकार को राजनीतिक प्रचार, दिखावे और ऐशो-आराम पर पैसा खर्च करने के बजाय पहले अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का वैध हक चुकाना चाहिए। पंजाब की जनता को विज्ञापन नहीं, जवाबदेही चाहिए और कर्मचारियों को प्रचार नहीं, उनका बकाया DA चाहिए।