नेटफ्लिक्स पर एक साउथ फिल्म लंबे समय से ट्रेंड कर रही है। इस फिल्म का नाम है सिंग गीतम। इस फिल्म की कहानी मजेदार है। साथ ही ये भी बताती है कि इस फिल्म का नाम सिंग गीतम क्यों पड़ा। कहानी एक गांव की है जिसकी जमीन सोना उगलती है। कुछ लोगों को इस सोने को पाने का लालच होता है और फिर बदल जाती है सभी गांव वालों की कहानी। इस फिल्म के अंत में विजय देवरकोंडा का कैमियो भी है। कुछ मिनट तक एक्टर स्क्रीन पर नजर आते हैं और जो सीन में होता है वो देखना मजेदार लगता है। IMDB पर इस फिल्म को 6.5 की रेटिंग मिली है।
प्रताप की किस्मत बदल जाती है
कहानी की शुरुआत एक प्रताप नाम के लड़के से होती है। प्रताप का कोई नहीं है और उसने लोगों से मोटा कर्जा लिया था। ये कर्ज वो नहीं चुका पाता इसलिए उसे जेल हो जाती है। अपनी जिंदगी जेल में बिताने के बाद जब वो बाहर आता है तो उसकी दुनिया बदल जाती है।उसे पता चलता है कि उसके पिता ने करोड़ों की जमीन ली हुई थी जिसके पेपर्स मिल गए हैं। प्रताप उस गांव में जाता है और उसकी मुलाकात एक गौरी नाम की लड़की से होती है जो पेड़ों की रक्षा कर रही है। मजदूरों की मदद करती है।
गांव की जमीन में है सोना
दूसरी तरफ प्रताप अपने पिता के चालाक दोस्त की बेटी रेनू के साथ गांव की उस जमीन पर माइनिंग के काम के लिए हां बोल देता है जो उसके पिता के नाम थी। प्रताप को पैसों का लालच होता है। गांव के एक आखिरी पेड़ को काट दिया जाता है। गौरी बहुत रोती है और कुबेर स्वामी के आगे प्रार्थना करती है। कुबेर स्वामी भी गौरी की बात सुन लेते हैं और पूरे गांव वालों को श्रापित कर देते हैं। अब गांव वाले सिर्फ गाते हुए ही अपनी बात कह सकते हैं और उनके मुंह से सच ही निकलता है। इसी बीच रेनू, गौरी को बता देती है कि वो आखिरी पेड़ काटने का फैसला प्रताप का था। ये सुनते ही गौरी का दिल टूट जाता है क्योंकि वो प्रताप से प्यार करने लगती है। प्रताप को एहसास होता है कि वो गलत कर रहा है। इसलिए अब वो गांव को हराभरा करने में मदद करेगा। वो कुबेर स्वामी के पास जाता है लेकिन गुफा से उसे कोई शक्ति बाहर फेंक देती है।
कुबेर स्वामी का श्राप
इसके बाद प्रताप को गांव का इतिहास पता चलता है। उसकी मां ने गांव में पेड़ लगाए थे। लेकिन लालच में गांव वालों ने सारे पेड़ कटवा दिए थे जिससे जमीन के अंदर से सोना निकाला जा सके। ये बात जब प्रताप को पता चलती है तो वापस से गांव को हराभरा करने लगता है। कुबेर स्वामी के श्राप की वजह से सभी लोग एक दूसरे को छूते ही सोना बन जाते हैं। ये देखकर विलेन रेनू का भी मन पिघल जाता है। वो और पूरा गांव कुबेर स्वामी से माफी मांगते हैं। अब सब ठीक हो जाता है। लेकिन फिर होती है एक बिजनेसमैन की एंट्री। वो गांव में छुपे सोने के बारे में जानता है इसलिए बिजनेस करने आया है। लेकिन जैसे ही वो एक पौधे को अपने पैर से कुचलता है तभी उन्हें श्राप लग जाता है और वो पागलों जैसी हरकत करने लगते हैं। इस बिजनेसमैन के किरदार में विजय देवरकोंडा होते हैं।