सरकार ने कहा कि देश में उर्वरकों की समग्र स्टॉक स्थिति संतोषजनक है। खरीफ 2026 के लिए, कृषि एवं कृषि एवं पशु कल्याण विभाग द्वारा उर्वरक की आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन 383.9 लाख मीट्रिक टन किया गया है। जबकि वर्तमान में भंडार लगभग 195.79 लाख मीट्रिक टन ( 51% से अधिक ) है, जो सामान्य स्तर (लगभग 33%) से काफी अधिक है।
पश्चिम एशिया में बदलती परिस्थितियों के बीच केंद्र सरकार लगातार दी जा रही जानकारियों के माध्यम से नागरिकों को सूचित रखने के अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है। इसी क्रम में गुरुवार को राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया, इस दौरान, रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने भी देश में उर्वरकों की उपलब्धता और भंडारण की स्थिति के बारे में जानकारी साझा की।
आपको बता दें, भारतीय किसानों ने चालू खरीफ-2026 में 07.06.2026 तक कुल 94.60 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक खरीद लिए हैं। यह कुल आवश्यकता का लगभग 25% है। वहीं, देश में जैविक खाद का भंडार लगभग 22.80 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध है।
युद्ध के बाद भारतीय किसानों ने 11.38 लाख मीट्रिक टन जैविक खाद (एफओएम/एलएफओएम/पीआरओएम) खरीदी (पंजाब में 2.88 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में 2.76 लाख मीट्रिक टन, हरियाणा में 1.37 लाख मीट्रिक टन, मध्य प्रदेश में 1.27 लाख मीट्रिक टन, गुजरात में 0.98 लाख मीट्रिक टन और महाराष्ट्र में 0.84 लाख मीट्रिक टन)। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह खरीद 3.24 लाख मीट्रिक टन थी।
यह उल्लेखनीय वृद्धि जैविक पोषक तत्वों के अधिक उपयोग की दिशा में सकारात्मक रुझान को दर्शाती है और किसानों की रासायनिक उर्वरकों से जैविक विकल्पों की ओर क्रमिक बदलाव का संकेत देती है। वर्तमान में, चालू खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता में कोई बड़ी चुनौती नहीं है।
दरअसल, संकट की स्थिति के बाद आयात और घरेलू उत्पादन के माध्यम से लगभग 153.79 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की कुल मात्रा उपलब्धता में जोड़ी गई है। इस मौजूदा संकट काल के दौरान भारत ने 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया और पी एंड के उर्वरक सुरक्षित कर लिए हैं।
विदेशों में स्थित 28 मिशनों के समन्वय से , भारत ने ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की, नीदरलैंड से यूरिया की आपूर्ति और रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया, सऊदी अरब से लाल सागर के रास्ते डीएपी/एनपीके की आपूर्ति सुनिश्चित की है।
वहीं, चालू जून माह में, भारतीय बंदरगाहों पर आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीके की मात्रा 25 लाख मीट्रिक टन से अधिक होने की उम्मीद है।
भारत ने 17 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद के लिए वैश्विक निविदा जारी की है , जिस पर काम चल रहा है। उर्वरकों के उत्पादन के लिए आवश्यक सामग्रियों, जैसे यूरिया और फास्फोरस एवं पोटेशियम उर्वरकों की उपलब्धता की समीक्षा उर्वरक विभाग द्वारा नियमित रूप से की जा रही है।
गौरतलब हो, कृषि विभाग नियमित रूप से कंपनियों द्वारा साप्ताहिक आधार पर जारी किए गए सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान कर रहा है और वर्तमान में उर्वरक सब्सिडी के भुगतान के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है। उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अब तक ईजीओएस की 12 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं और ईजीओएस द्वारा उपलब्धता में आने वाली अधिकांश चुनौतियों का समाधान किया गया है। देश की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर और सुव्यवस्थित बनी हुई है, और सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता लगातार आवश्यकता से अधिक है।