यूपी के इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी की आय कम है तो पति उसे भरण-पोषण देगा। शिक्षित पत्नी की मदद उसके मायके, माता-पिता द्वारा की जा रही है तब भी पति उसे गुजारा-भत्ता देगा। कोर्ट ने कहा, माता-पिता की पेंशन या संपत्ति को पत्नी की स्वतंत्र आय नहीं माना जा सकता और इससे पति का कानूनी दायित्व समाप्त नहीं होता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि पत्नी के माता-पिता की पेंशन या संपत्ति को पत्नी की स्वतंत्र आय के रूप में नहीं माना जा सकता और इससे पत्नी का भरण-पोषण करने का पति का कानूनी दायित्व समाप्त नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि जब इस बात का कोई सबूत नहीं है कि पत्नी वास्तव में पर्याप्त आय अर्जित कर रही है तो केवल इस तथ्य से कि पत्नी शिक्षित है, उसे भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद ने इन टिप्पणियों के साथ पति की याचिका खारिज कर दी। याचिका में परिवार न्यायालय मैनपुरी के उस फैसले और आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें याची को अपनी पत्नी को भरण-पोषण के रूप में प्रति माह 20 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। याची आलोक तिवारी का मुख्य तर्क यह था कि उसकी पत्नी शिक्षित, रोजगार योग्य और आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिला है। उसके पास अपने भरण-पोषण के लिए पर्याप्त साधन हैं और इसलिए वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की हकदार नहीं है।
यह भी कहा कि पत्नी ट्यूशन व कोचिंग के काम से कमाती है और अपनी मां की पेंशन व संपत्तियों से भी अपना भरण-पोषण करती है। पति ने यह भी तर्क दिया कि वह नियमित रोजगार में नहीं है और अपने वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बोझिल है इसलिए पारिवारिक न्यायालय द्वारा निर्धारित भरण-पोषण राशि अत्यधिक और असंगत है।
नाबालिग की बरामदगी का निर्देश
एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने हमीरपुर की एक नाबालिग के कथित अपहरण और अवैध रूप से बंधक बनाए जाने से जुड़े हैबियस कॉर्पस मामले में पुलिस को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पुलिस हरसंभव प्रयास कर रही है और उम्मीद जताई कि अगली सुनवाई तक या तो नाबालिग को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा या फिर जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल की जाएगी। न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की कोर्ट में 25 जून को हुई सुनवाई में हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि नाबालिग और उसे अपने कब्जे में रखने वाले व्यक्ति का पता लगाने को प्रयास किए जा रहे हैं।