चंडीगढ़ : सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट 2024 के अनुसार हरियाणा ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पिछले एक दशक में राज्य की शिशु मृत्यु दर (IMR) प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 41 से घटकर 24 हो गई है, जो 40 प्रतिशत से अधिक की कमी को दर्शाती है। स्वास्थ्य विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह सुधार लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के कारण संभव हुआ है। पिछले पांच वर्षों में हरियाणा की आईएमआर 28 से घटकर 24 तक पहुंची है, जो लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाती है। यह आंकड़े हरियाणा को राष्ट्रीय औसत के करीब लाते हैं और स्वास्थ्य ढांचे, नवजात देखभाल सेवाओं तथा मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों में किए गए निरंतर निवेश के सकारात्मक परिणाम को उजागर करते हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयास लगातार जारी हैं। हालांकि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन समग्र रुझान बाल स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की दिशा में स्पष्ट प्रगति दिखाता है।
SRS 2024 रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा की पांच वर्ष से कम आयु मृत्यु दर (U5MR) भी घटकर 31 रह गई है, जो 2013 में 45 थी। यह बच्चों के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार को दर्शाता है।
राज्य में विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (SNCU), कंगारू मदर केयर (KMC), पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम जैसी सेवाओं के विस्तार से स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत किया गया है।
आगे की दिशा में सरकार SNCU को मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल इकाइयों (MNCU) में अपग्रेड करने और प्रसव पूर्व व प्रसवोत्तर सेवाओं को और सशक्त बनाने पर काम कर रही है।
प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर माँ और नवजात को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और शिशु मृत्यु दर को और कम करना है।