चंडीगढ़ : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन हरियाणवी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। क्योंकि ऐसा लगता है, सत्ता में बैठी भाजपा ने उसे स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि जानबूझकर भर्तियों में धांधलियां की जाएं। पेपर लीक, क्वेश्चन कॉपी, गलत प्रश्न, गलत उत्तर जैसी धांधलियां करके भर्तियों को कई-कई साल लटकाया जाए और लंबे इंतजार के बाद कोई भर्ती पूरी भी की जाए तो तो उसका रिजल्ट ऐसा बनाया जाए कि उसमें ज्यादातर पद खाली ही रह जाएं।
पीजीटी कंप्यूटर साइंस का ताजा परिणाम इसका स्पष्ट उदाहरण है। हुड्डा ने कहा कि 2019 से लटकी पड़ी इस भर्ती के लिए 1711 पदों के आवेदन मांगे गए थे। लेकिन अब जाकर ये भर्ती सिरे चढ़ती हुई नजर आई तो एचपीएससी ने जानबूझकर 5100 अभ्यर्थियों में से मात्र 1101 अभ्यर्थियों को ही क्वालीफाई किया गया। यानी 600 से ज्यादा पद खाली रहने की पूरी संभावना है। सामान्य वर्ग तो सामान्य वर्ग आरक्षित कैटेगरी के भी बहुत सारे पद खाली रहने वाले हैं।
उदाहरण के तौर पर एससी केटेगरी में 342 पदों में से सिर्फ 53 अभ्यर्थियों का ही चयन संभव है। यानी 289 पद खाली रहेंगे। इसी तरह बीसी-ए में 171 पदों में से मात्र 105 अभ्यर्थियों का ही चयन होता नजर आ रहा है, यानी यहां भी 66 पद खाली रहेंगे। इसी तरह ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में 171 पदों के मुकाबले मात्र 62 का ही विस्तृत परिणाम आया है, यानी यहां भी 100 से ज्यादा पड़ खाली रहेंगे। यह कोई पहला मौका नहीं है, जब बीजेपी सरकार ने इस तरह के नतीजे घोषित किए हैं। हर बार, हर भर्ती में यही होता है कि या तो पदों को खाली छोड़ दिया जाता है या फिर हरियाणवियों की बजाए अन्य राज्य के लोगों को ज्यादा तरजीह दी जाती है।
हुड्डा ने बताया कि असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश के 613 पदों पर मात्र 151 अभ्यर्थियों का चयन किया गया और बाकी पद खाली छोड़ दिए गए। डीएससी वर्ग के साथ सबसे बड़ा अन्याय करते हुए 60 रिजर्व सीट्स में से केवल 1 का चयन किया गया। 35% कंडीशन की आड़ में बाकी सीटें खाली छोड़ दी गईं। जबकि कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो चुका है कि सरकार की 11.11.2022 की गाइडलाइन के कुछ प्रावधान UGC गाइडलाइन 2018 के क्लॉज़ 4, 5 और 6 का उल्लंघन करते हैं। इसलिए इनके आधार पर जारी विज्ञापन और भर्ती प्रक्रिया भी तय व्यवस्था के खिलाफ है।
हाईकोर्ट के फैसले से साफ हो गया कि बीजेपी सरकार ने जानबूझकर ऐसे नियम बनाए ताकि ज्यादातर नौकरियां हरियाणा के युवाओं की बजाय बाहरी लोगों को मिल सके। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर साइकोलॉजी भर्ती में भी 85 पद के लिए 400 अभ्यर्थियों में से मात्र 3 को ही पास किया गया। हरियाणा पावर यूटिलिटीज (HPU) में असिस्टेंट इंजीनियर AE/SDO भर्ती में 214 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया, जिसमें से केवल 29 हरियाणा के थे। इससे पहले सिविल सिंचाई विभाग में 49 में से 28 हरियाणा से बाहर के उम्मीदवार थे।
एसडीओ इलेक्ट्रिकल में 80 में से 78 बाहर के, केवल 2 ही हरियाणा के थे। इसी तरीके से टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में लेक्चरर में 153 में से 106 बाहरी उम्मीदवार चयनित हुए। HPSC ने विकास और पंचायत विभाग में SDE (सिविल) की भर्ती में सामान्य वर्ग के 48 पदों में से अन्य प्रदेशों के 19 अभ्यर्थियों का चयन किया है। इससे पहले दिसंबर 2023 में सरकार ने 7 BDPO भर्ती किए, जिनमें से 4 गैर-हरियाणवी थे। यानी आधे से ज्यादा हरियाणा के बाहर के थे। फरवरी 2021 में हुई SDO इलेक्ट्रिकल की भर्ती में 77 बाहर के थे और 22 हरियाणा के थे। ये वहीं भर्ती थी जिसे 2019 चुनावों से पहले कैंसिल किया गया था। क्योंकि पहले इस भर्ती में 80 में से 78 बाहर के अभ्यार्थियों को सिलेक्ट किया गया।
इसी तरह लेक्चरर ग्रुप-B (टेक्निकल एजुकेशन) की भर्ती में सामान्य श्रेणी के 157 में से 103 अभ्यार्थी हरियाणा से बाहर के सेलेक्ट हुए थे। साल 2019 में असिस्टेंट प्रोफेसर पॉलिटिकल साईंस की भर्ती में 18 में से 11 उम्मीदवार बाहरी थे और सिर्फ 7 हरियाणवी थे। कृषि विभाग के लिए HPSC ने 600 ADO पदों के लिए भर्ती निकाली थी। लेकिन सिर्फ 57 कैंडिडेट्स को पास करके इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और उनमें से भी 50 का ही चयन किया गया। हैरानी की बात है कि भर्ती में जनरल केटेगरी के 23 पदों में से 16 पदों पर हरियाणा से बाहर के उम्मीदवारों का चयन किया गया।