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सैनिकों की हुई कमी तो यूक्रेन ने युद्ध में उतारे रोबोट, ‘साइलेंट डेथ’ बनकर रूस पर ढा रहे कहर

31 मई, 2026 02:02 PM

कीव: युद्ध के मैदान में अब सिपाही गोलियां नहीं बरसा रहे हैं। अब रोबोट ‘साइलेंट डेथ’ बनकर दुश्मन पर कहर बरपा रहे हैं। यह नजारा है रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का। रूस-ईरान युद्ध अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। सैनिकों की हुई कमी तो यूक्रेन ने युद्ध में उतारे रोबोट, ‘साइलेंट डेथ’ बनकर रूस पर ढा रहे कहर युद्ध के मैदान में अब सिपाही गोलियां नहीं बरसा रहे हैं। अब रोबोट ‘साइलेंट डेथ’ बनकर दुश्मन पर कहर बरपा रहे हैं। यह नजारा है रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का। रूस-ईरान युद्ध अपने चौथे साल में प्रवेश कर चुका है। अब हालत यह है कि यूक्रेन के पास सैनिकों की कमी पड़ने लगी है। इसकी भरपाई करने के लिए उसने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। इसके लिए बड़े पैमाने पर रोबोट सैनिक तैयार किए गए हैं। ऐसे में जहां हजारों सिपाहियों की जरूरत थी, वहां केवल कुछ मशीनें सबकुछ तहस-नहस कर डाल रही हैं।


सैनिकों की पड़ने लगी है कमी
रूस ने साल 2022 में यूक्रेन पर हमला बोला था। उस वक्त लगा था कि यह युद्ध महज कुछ दिनों में रूस जीत लेगा। लेकिन यूक्रेन ने बड़ी बहादुरी से सामना किया और युद्ध अब चौथे साल में खिंच चुका है। लेकिन इन सबमें यूक्रेन के पास सैनिकों की कमी पड़ने लगी है। ऐसे में उसने टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है। अब हथियार और विस्फोटक लादे ड्रोन्स और रोबोट्स दुश्मन को ठिकाने लगा रहे हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक इन रोबोट्स को हजारों मील दूर से ऑपरेट किया जा रहा है। रूसी सेना के ठिकानों और पोजीशंस को ट्रैक करने के बाद हमलों को अंजाम दिया जा रहा है।

जेलेंस्की ने क्या कहा
यू्क्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक इस साल केवल जनवरी में ही 22 हजार से ज्यादा ड्रोन्स और रोबोट युद्ध में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने यह भी दावा किया हाल ही में यूक्रेन ने बिना एक भी सैनिक को मैदान में उतारे, केवल रोबोट्स और ड्रोन्स के दम पर रूसी पोजीशन पर कब्जा कर लिया। युद्ध के मैदान में मशीनों की तैनाती यह दिखाती है कि अब चीजें किस तरह से बदल गई हैं। यह रोबोट सोल्जर्स और ड्रोन्स न केवल युद्ध लड़ रहे हैं, बल्कि बचाव कार्य में भी मददगार साबित हो रहे हैं। इनकी मदद से फ्रंटलाइन पर हथियार, खाना और पानी पहुंचाना आसान हुआ है। वहीं, घायल सिपाहियों को हटाना और उन्हें सुरक्षित जगह ले जाने में भी यह सटीक साबित हो रहे हैं।

युवा प्रोग्रामर्स बने मददगार
कुछ रोबोट सिस्टम को हैवी मशीनगन से लैस किया गय है। यह कई दिनों तक छिपे तौर पर सकते हैं और मौका मिलते ही हमला बोल सकते हैं। इस मिशन में युवा प्रोग्रामर्स और टेक्नीशियंस को लगाया गया है। यह सब मिलकर कम्यूनिकेशन सिस्टम, नेविगेशन सॉफ्टवेयर और काउंटर-जैमिंग टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। इनकी मदद से यूक्रेनी रूसी सेना को टक्कर देने में कामयाब हो रहा है। इसके अलावा भी टेक्नोलॉजी का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। चाहे वो ड्रोन्स और रोबोट्स के सफल मूवमेंट के लिए जीपीएस की बात हो या फिर ड्रोन्स फुटेज को रिकॉर्ड करने की बात हो।

हजारों सैनिकों का काम कर रहे कुछ रोबोट्स
विशेषज्ञों का कहना है यूक्रेन ने बहुत जल्द ही ड्रोन और रोबोट में निवेश कर दिया। इसकी बदौलत वह न सिर्फ रूस को कड़ी टक्कर दे रहा है, बल्कि अपने देश के सिपाहियों की बहुमूल्य जान भी बचा रहे हैं। यूक्रेनी कमांडरों का तर्क है कि रोबोट जान बचा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ 164 रोबोट की मदद से ऐसे परिणाम हासिल किए गए हैं, जिसके लिए हजारों सैनिकों की जरूरत पड़ती। बखमुत और अवदीवका जैसी जंग में शामिल रहे योद्धाओं का कहना है कि अगर युद्ध की शुरुआत में यह तकनीक उपलब्ध होती तो कई साथी सैनिकों की जान बच सकती थी।

 

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