नई दिल्ली(एजेंसी) : वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज की शुरुआत से पहले भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने प्रयोग करने से ज्यादा नतीजों पर ध्यान देने की बात कही है। उनका कहना है कि अलग-अलग कॉम्बिनेशन आजमाने से पहले सीरीज जीतना प्राथमिकता होगी।
6 अक्टूबर को होने वाले ओपनिंग टी20 मुकाबले से पहले बात करते हुए अय्यर ने कहा कि सीरीज की शुरुआत में बहुत ज्यादा प्रयोग करने से खिलाड़ियों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है और युवा टीम के लिए जरूरी आत्मविश्वास कम हो सकता है। भारत अपने आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप खिताब का बचाव करने की तैयारी कर रहा है, ऐसे में उम्मीद है कि टी20 इंटरनेशनल सेटअप में युवा खिलाड़ियों को मौके दिए जाएंगे और साथ ही एक मजबूत कोर टीम भी तैयार की जाएगी। हालांकि, अय्यर का मानना है कि विकल्पों को आजमाने की प्रक्रिया को सावधानी से संभालने की जरूरत है, और जीत ही पहला मकसद होना चाहिए।
अय्यर ने 'जियोस्टार' से कहा, "मेरे लिए सबसे जरूरी चीज सीरीज जीतना है और उसके बाद हम प्लेइंग कॉम्बिनेशन के साथ प्रयोग कर सकते हैं। शुरुआत से ही प्रयोग करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि इससे खिलाड़ी असुरक्षित महसूस करने लगते हैं और फिर वे खुद पर और ड्रेसिंग रूम में मौजूद दूसरों पर सवाल उठाने लगते हैं। फिर वे उस उलझन वाले दौर में चले जाते हैं जहां उन्हें लगता है कि क्या मुझे आगे मैच मिलेगा या नहीं?, मुझे ऐसी सोच पसंद नहीं है। मैं भी पहले ऐसी सोच का शिकार रहा हूं और मुझे पता है कि अंदर से कैसा महसूस होता है।"
अय्यर का यह नजरिया टीम सिलेक्शन के साथ-साथ खिलाड़ियों के मैनेजमेंट पर भी आधारित है। उनका मानना है कि सिलेक्शन को लेकर अनिश्चितता खिलाड़ी पर तब भी असर डाल सकती है जब वह बैटिंग या बॉलिंग करने के लिए मैदान पर भी न उतरा हो, खासकर तब जब स्क्वाड के कई सदस्य सीमित मौकों के लिए मुकाबला कर रहे हों।
कप्तान चाहते हैं कि टीम ज्यादा आजादी और भरोसे के साथ खेले। उन्हें लगता है कि ऐसी टीम के लिए यह तरीका बहुत जरूरी है जिसमें अनुभवी खिलाड़ियों और उभरती हुई प्रतिभाओं का मिश्रण हो। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि खिलाड़ी खुलकर और बिना डर के खेलें। उन्हें अपनी स्वाभाविक सोच और खेल के तरीके पर भरोसा करना चाहिए। अगर खिलाड़ी अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति को दबाते हैं, तो वे अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाते।"
अय्यर ने कहा, "मुझे लगता है कि बाहरी उम्मीदों और दबाव के बजाय हमें खुद पर विश्वास रखना चाहिए। टीम के अंदर के खिलाड़ी और स्टाफ अच्छी तरह जानते हैं कि टीम किस स्थिति में है और खिलाड़ी क्या सोच रहे हैं। इसी वजह से अच्छे और बुरे दोनों समय में एक-दूसरे का साथ देना बहुत जरूरी है। खासकर मुश्किल दौर में पूरी टीम को एकजुट रहना चाहिए और एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए।"