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दुनिया

शेख हसीना की वापसी के ऐलान से डरी हुई है तारिक रहमान सरकार: वीणा सिकरी

18 अगस्त, 2026 12:13 PM

बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार शेख हसीना के दिसंबर तक देश लौटने के ऐलान से डरी हुई है। उनके मुताबिक, अवामी लीग की बढ़ती लोकप्रियता की वजह से ही ढाका भारत से दूरी बना रहा है और भारत के न्योते का 6 महीने से जवाब नहीं दे रहा।

उन्होंने कहा कि शेख हसीना को बहाना बनाकर रहमान सरकार भारत आने से बच रही है, जबकि प्रत्यर्पण पूरी तरह कानूनी मामला है। पूर्व राजनयिक ने यह भी कहा कि तारिक रहमान खुद कभी शेख हसीना के खिलाफ बोलते थे, लेकिन सत्ता में आते ही उनका रुख बदल गया है।
पूर्व हाई कमिश्नर ने कहा, “प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत आने का न्योता छह महीने पहले, फरवरी 2026 में दिया गया था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। मुझे लगता है कि भारत सरकार की तरफ से पीएम तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला पहला न्योता था, और हम छह महीने से जवाब का इंतजार कर रहे हैं। कुछ हफ्ते पहले, हमने बिम्सेटक के चेयरमैन के तौर पर उन्हें ब्रिक्स समिट के लिए दूसरा न्योता दिया था।”

उन्होंने आगे कहा, “मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए जाने पर तारिक रहमान ने कहा था कि हम किसी भी पार्टी पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध का समर्थन नहीं करते हैं। पार्टी सक्रिय रहनी चाहिए। अगर लोग पसंद नहीं करेंगे, तो उस पार्टी के लिए वोट नहीं करेंगे। जब रहमान लंदन में रहते थे, तो वह अक्सर राजनीतिक रैली को वीडियो के माध्यम से संबोधित करते थे। वह सरकार के खिलाफ सभी तरह की टिप्पणी करते थे। शेख हसीना ने कभी भी उन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया।”

वीणा सिकरी ने कहा कि रहमान के प्रधानमंत्री बनते ही, इस तरह की कार्रवाई हो रही है। वह भारत में नहीं आने के पीछे शेख हसीना को एक वजह के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले ऐसी चर्चा थी कि 20-22 अगस्त तक रहमान भारत आ सकते हैं। हालांकि, अचानक से शेख हसीना की 5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इसे एक मुद्दा बनाया जा रहा है। प्रत्यर्पण एक कानूनी मामला है, जिसमें लंबा वक्त लगता है। बांग्लादेश की सरकार डर गई है। शेख हसीना ने ऐलान किया कि वह दिसंबर तक अपने देश वापस लौट जाएंगी। इसकी वजह से ही रहमान सरकार डर गई है। उन्हें पता है कि अवामी लीग काफी लोकप्रिय है और उनकी लोकप्रियता हर दिन बढ़ रही है।

मेजर जनरल (रिटायर्ड) ध्रुव कटोच ने कहा, “सबसे पहले, मुझे लगता है कि अभी माहौल बिल्कुल सही है। अगर बांग्लादेश सुधार चाहता है, तो यह बांग्लादेश पर है। अगर वे संबंध सुधारना चाहते हैं, तो उन्हें वहां अपनी स्थिति सुधारनी चाहिए। जहां तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण की बात है, तो यह किसी भी हालत में नहीं होगा। शेख हसीना ने यहां शरण ली है और जब तक वह चाहेंगी, वह यहीं रहेंगी। अगर बांग्लादेश, चीन-पाकिस्तान के साथ अपनी दोस्ती मजबूत करना चाहता है, तो यह उसकी मर्जी है। बस एक ही बात है कि उसे भारत के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।

हम चाहते हैं कि हमारी सीमा सुरक्षित रहे, किसी भी हालत में।” भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह ने दोनों देशों के बीच संबंध को लेकर कहा, “बहुत सारी समस्या हैं, लेकिन हर चुनौती या कमी मिलकर काम करने का एक मौका है। बहुत सारे एमओयू पर हस्ताक्षर हो रहे हैं और आम लोग उच्चायुक्त या राजदूत से पूछ रहे हैं, ‘मैं इससे कैसे जुड़ सकता हूं?'”

उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह ने कहा, “मैं उस चिट्ठी का जिक्र कर रहा हूं जो प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 26 फरवरी को भारत सरकार को लिखा था, जहां पैराग्राफ तीन में तीन उदाहरण हैं। एक वह था जब उन्होंने कहा, ‘आम लोगों की उम्मीदें’ आम अंडरलाइन किया हुआ। वह आसानी से ‘लोग’ कह सकते थे। उन्होंने ‘आम’ का इस्तेमाल क्यों किया? ‘हमारे को ऑपरेटिव एंगेजमेंट को फिर से मजबूत करें।’ वह आसानी से ‘कोऑपरेशन’ या ‘हमारे एंगेजमेंट’ कह सकते थे। ‘कोऑपरेटिव एंगेजमेंट’ क्यों?” उन्होंने कहा कि लोगों के बीच जुड़ाव वाली बात अब बहुत रटी-रटाई लगने लग रही है। हम सहयोग के मामले में ज्यादा अटके हुए हैं, सहकारिता के मामले में नहीं। हमारे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था लगभग 95-99 फीसदी प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर है।

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