भाजपा द्वारा मनाए जा रहे विभाजन विभीषिका दिवस को लेकर अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा के प्रदेश प्रवक्ता सुशील बंसल ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बंटवारे की याद को सम्मान देना जरूरी है, लेकिन भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए सिर्फ एक बिरादरी के चश्में से देख रही है।
सुशील बंसल ने कहा विभाजन विभिषिका भले ही भाजपा मना रही हो, लेकिन यह काम सिर्फ एक बिरादरी को ही केंद्र में बिंदू मानकर किया जा रहा है। उनका इशारा विभाजन दिवस के लिए बनाई गई आयोजन समिति की ओर है, जिसमें सभी सदस्य पंजाबी बिरादरी से लिए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने विभाजन विभीषिका दिवस के लिए जो आयोजन समिति बनाई है, उसमें सभी सदस्य पंजाबी बिरादरी से हैं। भाजपा की नजर में पंजाबी बिरादरी ही बंटवारे में यहां आई थी, जबकि सच यह है कि विभाजन के समय 36 बिरादरियों से लोग पाकिस्तान से यहां आए थे। अनेक समुदायों ने अपना घर-बार छोडक़र यहां शरण ली थी।
सुशील बंसल के अनुसार बंटवारे का दर्द किसी एक समुदाय का नहीं था। यह पूरे देश और सभी समुदायों का सांझा जख्म है। ऐसे में अगर कार्यक्रम होते हैं तो उसमें सभी प्रभावित समुदायों का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। भाजपा में शामिल अन्य बिरादरी के लोगों को भी इस संबंध में आवाज उठाते हुए अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बंटवारे में आए हुए अग्रवाल समाज के लोगों का हिसार में प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम करके सम्मान करेगी। सरकार से उन्हें उम्मीद नहीं है।
अग्रवाल वैश्य समाज के प्रवक्ता सुशील बंसल ने आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास को एक खास एंगल से पेश कर रही है। भाजपा राजनीतिक लाभ के लिए पंजाबियों को ही सर्वोपरि मान रही है। बाकी बिरादरियों के बलिदान और संघर्ष को दरकिनार किया जा रहा है। यह इतिहास के साथ अन्याय है।
सुशील बंसल ने कहा कि हरियाणा एक गंगा-जमुनी तहजीब वाला प्रदेश है। यहां सभी बिरादरियां मिल-जुलकर रहती हैं। ऐसे समय में जब देश को एकजुटता की जरूरत है, इस तरह का एकतरफा आयोजन समाज में दूरियां पैदा करेगा।
उन्होंने कहा कि अगर विभाजन की याद को सिर्फ एक बिरादरी से जोडक़र देखा जाएगा तो इसका संदेश गलत जाएगा। इस तरह की कार्यप्रणाली समाज में खाई पैदा करती है। हमें बंटवारे से सबक लेकर यह सीखना है कि नफरत और विभाजन से क्या नुकसान होता है। अगर आज भी लोगों को बिरादरी के नाम पर बांटा गया तो फिर उसी गलती को दोहरा रहे हैं जिसके कारण देश के टुकड़े हुए थे।
उन्होंने मांग की कि सरकार विभाजन विभीषिका दिवस के कार्यक्रमों में सभी 36 बिरादरियों को शामिल करे। आयोजन समितियों में विविधता हो और कार्यक्रमों में उन सभी परिवारों को सम्मान दिया जाए, जिन्होंने बंटवारे का दंश झेला। सुशील बंसल ने कहा कि इतिहास को सम्मान देना चाहिए, लेकिन उसे बांटने का औजार नहीं बनाना चाहिए।