भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 8.663 अरब डॉलर बढ़कर ऑल-टाइम हाई 725.727 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में दी गई।
पिछले सप्ताह गिरावट के बाद मजबूत उछाल
इससे पहले के सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में 6.711 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसकी मुख्य वजह सोने की कीमतों में कमी बताई गई थी।
गोल्ड रिजर्व और एफसीए में बढ़ोतरी
आरबीआई के अनुसार, 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.990 अरब डॉलर बढ़कर 128.466 अरब डॉलर हो गया। वहीं, विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स (एफसीए) की वैल्यू 3.550 अरब डॉलर बढ़कर 573.603 अरब डॉलर पर पहुंच गई। एफसीए में डॉलर के अलावा येन, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनका मूल्य डॉलर में आंका जाता है।
एसडीआर और रिजर्व पोजीशन में भी इजाफा
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में एसडीआर का मूल्य 10.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.924 अरब डॉलर हो गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की रिजर्व पोजीशन 1.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.734 अरब डॉलर हो गई।
अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमुख संकेतक
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक होता है और यह विनिमय दर को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यदि डॉलर के मुकाबले रुपए पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर मुद्रा की स्थिरता बनाए रख सकता है।
विदेशी व्यापार और निवेश को मिलता है सहारा
बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार यह संकेत देता है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश को भी बढ़ावा मिलता है।