अंबाला : सरकारी स्कूलों को लेकर अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि वे निजी स्कूलों की बराबरी नहीं कर सकते, लेकिन अंबाला के गांव झाडूमाजरा का सरकारी मिडल स्कूल इस सोच को पूरी तरह बदल रहा है. सुविधाओं, सौंदर्यीकरण और नवाचार के मामले में यह स्कूल अब निजी संस्थानों को भी पीछे छोड़ता नजर आ रहा है. यहां की व्यवस्थाएं न केवल छात्रों को बेहतर माहौल दे रही हैं, बल्कि अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत कर रही हैं.
निरीक्षण में दिखी व्यवस्था: मुख्यमंत्री सौंदर्यीकरण योजना के तहत इस वर्ष जिला स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करने वाले इस स्कूल का जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ज्योति सभ्रवाल ने औचक निरीक्षण किया. उन्होंने स्कूल की इमारत, स्वच्छ प्रांगण, आधुनिक कंप्यूटर रूम, लाइब्रेरी, हॉल, मिड डे मील किचन और विशेष रूप से किचन गार्डन का बारीकी से जायजा लिया. व्यवस्थाओं और साफ-सफाई को देखकर वह काफी प्रभावित हुईं.
अधिकारी ने की खुलकर सराहना: निरीक्षण के बाद ज्योति सभ्रवाल ने कहा कि, "जिस प्रकार एक सरकारी स्कूल को इतने व्यवस्थित और आकर्षक रूप में विकसित किया गया है, वह काबिले-तारीफ है. इस स्कूल का निरीक्षण स्वयं शिक्षा मंत्री को करना चाहिए, क्योंकि यह विद्यालय पूरे प्रदेश के लिए एक मॉडल के रूप में उभर रहा है." उनकी सराहना से स्कूल स्टाफ और विद्यार्थियों में नया उत्साह देखने को मिला.
पूर्व छात्र ने भी जताया गर्व: इस स्कूल के पूर्व छात्र वर्याम सिंह, जो 1988 में अमेरिका चले गए थे, आज भी जब भारत लौटते हैं तो अपने स्कूल आना नहीं भूलते. उन्होंने कहा कि, "स्कूल बेहद साफ-सुथरा है और यहां का स्टाफ व विद्यार्थी अनुशासित और मेहनती हैं. यह स्कूल कई निजी स्कूलों को भी मात देता है. मेरी अपील है कि यदि सभी लोग मिलकर सरकारी स्कूलों पर ध्यान दें, तो निजी स्कूलों की ओर देखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी."
प्रेरणा बन रही सरकारी शिक्षा व्यवस्था: लगातार जिला और राज्य स्तर पर पुरस्कार जीतने वाला यह स्कूल आज सरकारी शिक्षा व्यवस्था की प्रेरक मिसाल बन चुका है. यह साबित करता है कि मजबूत इच्छाशक्ति, समर्पित स्टाफ और सामूहिक प्रयास से सरकारी स्कूल भी उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं. झाडूमाजरा का यह विद्यालय न केवल अंबाला बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है.