मैं आज अपने दोस्त की केमिस्ट शॉप पर गया। जहां पर उसका बेटा अग्रिम गुप्ता भी बैठा हुआ था मैं वहां पर गया तो उसके बेटे के पास एक पिज़्ज़ा डिलीवरी करने वाला लड़का आया मेरे दोस्त का बेटा बोला आपका टाइम 30 मिनट का होता है आप लेट हो तो उसके बाद पिज़्ज़ा डिलीवरी करने वाला लड़का बोला सर 30 मिनट से लेट हो गया हैं। गलती हमारी तरफ से है। अगर आपने पेमेंट करनी है तो कर दीजिए नहीं तो इसकी हमें प्लेंटी पड़ेगी। जो के पूरे स्टाफ को अपनी सैलरी में से कटवानी पड़ेगी। इसी बात पर मेरे दोस्त के बेटे ने डिलीवरी मैन को पेमेंट तो कर दी। लेकिन उसके दिमाग में एक बात आई कि अगर यही नियम मेडिकल लाइन में एंबुलेंस पर होनी चाहिए कि अगर एंबुलेंस 30 मिनट लेट आपके पास पहुंचती है तो पेशेंट का खर्चा हॉस्पिटल के कर्मचारियों को या हॉस्पिटल को उठाना पड़ेगा तो ऐसी कोई सरकार की तरफ से योजना आनी चाहिए अगर एंबुलेंस देरी से आती है या तो उसका कुछ प्रतिशत मेडिकल का खर्चा अस्पताल स्टाफ को उठाना पड़े। तो इससे बहुत से मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उसकी यह बात सुनकर मेरा मन किया कि मैं आप लोगों से यह बात शेयर करूं इससे जनता में जागृति आए।