चंडीगढ़ : घाव भले ही छोटा दिखाई दे रहा हो, लेकिन उसका खतरा बिल्कुल भी छोटा नहीं था। शुगर से पीड़ित व्यक्ति के पैर पर लगी एक छोटी-सी चोट धीरे-धीरे गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति का रूप धारण कर सकती है। नसों को नुकसान पहुंचने के कारण दर्द महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है, जिसके चलते चोट का पता लगना मुश्किल हो जाता है। रक्त संचार खराब होने से घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इससे संक्रमण गहरे ऊतकों तक फैल सकता है और गंभीर मामलों में अंग गंवाने तक का खतरा पैदा हो सकता है।
पंजाब के सैकड़ों मरीजों के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना (एम.एम.एस.वाई.) उस समय सुरक्षा कवच बनी, जब डायबिटिक फुट की समस्या स्वास्थ्य लाभ के लिए गंभीर चुनौती बन गई थी।
47 वर्षीय हरचरण सिंह एडवांस्ड डायबिटिक फुट की बीमारी से जूझ रहे थे। नसों को नुकसान पहुंचने के कारण उनकी चोट का पता चलने की क्षमता कम हो गई थी, जबकि संक्रमण गहरे ऊतकों तक फैल चुका था। डॉक्टरों ने संक्रमित और मृत ऊतकों को हटाने तथा पैर को ठीक करने के लिए सर्जिकल डिब्राइडमेंट किया।
38 वर्षीय राजा को भी इसी तरह के खतरे का सामना करना पड़ा। डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण उन्हें पैर पर हुए घाव का कोई अहसास ही नहीं हुआ, जो बाद में गंभीर संक्रमण में बदल गया और स्थिति हड्डी तक संक्रमण पहुंचने तक जा पहुंची। ऐसी स्थिति में समय पर सर्जरी करना आवश्यक हो गया।
एक अन्य लाभार्थी 57 वर्षीय वीना का रक्त संचार खराब होने के कारण घाव भरना मुश्किल हो गया था। उनका अल्सर इस हद तक बढ़ गया था कि पैर काटने की नौबत आने का खतरा पैदा हो गया था। संक्रमित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी करनी पड़ी।
इसी तरह 67 वर्षीय संतोख सिंह के पैर में लंबे समय से न भरने वाला डायबिटिक फुट अल्सर हो गया था, जिसमें मवाद बनना शुरू हो गया था। संक्रमण को दूर करने और प्रभावित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जिकल प्रक्रिया आवश्यक थी।
चार मरीज। चार अलग-अलग समस्याएं। एक डरावनी संभावना—अंग गंवाने की।
लेकिन समय पर मिले उपचार ने इन चारों मरीजों को संक्रमण से लड़कर अपने अंग बचाने का अवसर दिया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत हर आंकड़े के पीछे एक इंसानी जिंदगी है—एक पिता, एक मां, एक बेटा या एक बेटी, जिसका परिवार एक और अवसर की उम्मीद कर रहा है। डायबिटिक फुट की जटिलताएं धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं और यदि उपचार में देरी हो तो चलने-फिरने की क्षमता और यहां तक कि अंग गंवाने का भी खतरा पैदा हो सकता है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के किसी भी परिवार को समय पर उपचार करवाने के लिए खर्च के बोझ की चिंता न करनी पड़े।”
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना इस उद्देश्य से तैयार की गई है कि जब कोई मरीज अस्पताल पहुंचे तो ध्यान मरीज की जान बचाने पर हो, न कि इस बात पर कि उसका परिवार इलाज का खर्च उठा सकेगा या नहीं।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना की सफलता को केवल उपचारों की संख्या या खर्च की गई राशि से नहीं मापा जाना चाहिए, बल्कि इस बात से मापा जाना चाहिए कि इन उपचारों ने क्या संभव बनाया—एक मरीज का स्वस्थ होकर घर लौटना, एक परिवार को आर्थिक परेशानी से बचाना और डायबिटिक फुट जैसी स्थितियों में उस अंग को बचा पाना, जिसे अभी भी बचाया जा सकता है। जन-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली का यही उद्देश्य है: जब परिवारों को जरूरत हो, तब उनके साथ मजबूती से खड़े रहना।”
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत पिछले लगभग आठ महीनों के दौरान 560 मरीजों को डायबिटिक फुट और इससे जुड़ी जटिलताओं का उपचार उपलब्ध करवाया गया, जिस पर कुल 1.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सर्जिकल उपचार इसमें सबसे बड़ा हिस्सा रहा। इसके तहत 126 मरीजों का उपचार किया गया और 44.55 लाख रुपये खर्च हुए। इसी दौरान 123 मरीजों को मेडिकल मैनेजमेंट उपलब्ध करवाया गया।
बाकी मामलों में लंबे समय तक ड्रेसिंग और एंटीबायोटिक उपचार, टो और फुट सर्जरी, घुटने से नीचे वाले हिस्से से संबंधित प्रक्रियाएं, स्किन ग्राफ्टिंग, सी.टी. स्कैन और एम.आर.आई. जैसी इमेजिंग जांचें, रक्त और प्लेटलेट्स के ट्रांसफ्यूजन के अलावा डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, गंभीर सेप्सिस और एनीमिया जैसी गंभीर स्थितियों का उपचार भी शामिल था।
यही वह जगह है जहां मुख्यमंत्री सेहत योजना कागजों पर बनी किसी नीति से आगे बढ़कर वास्तविक रूप में सहायता करती है। इन मरीजों के लिए इसका मतलब था कि उपचार शुरू करते समय किसी महंगे अस्पताल के बिल का बोझ उनके सामने नहीं था, जिसे वहन करना उनके लिए मुश्किल होता और जो खुद एक अन्य आपात स्थिति का कारण बन सकता था।