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हरियाणा

परीक्षा के तनाव से बच्चों को निकालेंगे शिक्षक, हरियाणा के 200 सरकारी स्कूलों में शुरू होगी मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली

07 नवंबर, 2026 08:24 PM

चंडीगढ़ : स्कूली विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव, चिंता और अवसाद से उबारने के लिए हरियाणा सरकार स्कूल स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली शुरू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित ‘साथ’ (SAATH) परियोजना के तहत प्रदेश के 200 सरकारी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता और परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल में शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देकर बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों की समय रहते पहचान करने के लिए तैयार किया जाएगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस पहल में स्वास्थ्य एवं स्कूल शिक्षा विभाग के साथ शिक्षक, अभिभावक, छात्र स्वयंसेवक, परामर्शदाता, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक मिलकर काम करेंगे। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानना, उन्हें सहयोग देना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों तक पहुंचाना है।

122 परामर्शदाता, 400 शिक्षकों का नेटवर्क
इस कार्यक्रम के लिए स्वास्थ्य विभाग के 122 परामर्शदाताओं को पेशेवर सहायता उपलब्ध कराने के लिए चिह्नित किया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक भागीदार स्कूल में दो शिक्षकों को नामित किया जाएगा। इस तरह करीब 400 शिक्षकों का नेटवर्क तैयार होगा। मनोविज्ञान की शैक्षणिक योग्यता रखने वाले शिक्षक भी इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। परियोजना के तहत शिक्षकों को बच्चों में लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी, पढ़ाई में गिरावट और स्कूल जाने से आनाकानी जैसे व्यवहारिक बदलावों को पहचानने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा बुलिंग, सामाजिक अलगाव, अत्यधिक गेमिंग, सोशल मीडिया पर निर्भरता, अनुचित ऑनलाइन सामग्री और नींद की कमी जैसी समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

छोटे बच्चों के लिए भावनात्मक जागरूकता
छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम में भावनात्मक जागरूकता, आत्मविश्वास, किशोरावस्था के बदलाव, परीक्षा की चिंता, बुलिंग और परिवार के साथ संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी। इस आयु वर्ग के बच्चों को अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें सही तरीके से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। शिक्षकों को यह भी सिखाया जाएगा कि बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव आने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय संवेदनशीलता के साथ संवाद किया जाए। समय रहते सहयोग मिलने से बच्चों को तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने में मदद मिल सकेगी।

बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव पर विशेष ध्यान
कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता का दायरा और व्यापक होगा। इसमें बोर्ड परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, करियर को लेकर अनिश्चितता, साथियों का दबाव, चिंता और अवसाद के लक्षण, अस्वास्थ्यकर खान-पान तथा नशीले पदार्थों के जोखिम को शामिल किया गया है। विद्यार्थियों में खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या संबंधी विचारों के संकेतों की पहचान करने पर भी विशेष जोर रहेगा। ऐसे मामलों में तत्काल विशेषज्ञ सहायता और उचित रेफरल की व्यवस्था की जाएगी।

पांच स्तरों पर होगी पहचान और सहायता
विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान और सहायता के लिए पांच स्तरीय तंत्र विकसित किया जाएगा। इसकी शुरुआत कक्षा शिक्षक से होगी, जो बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों का अवलोकन करेंगे और आवश्यक रिकॉर्ड रखेंगे। प्रशिक्षित शिक्षक और परामर्शदाता अपनी पेशेवर योग्यता के दायरे में स्क्रीनिंग, परामर्श और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएंगे। जिन विद्यार्थियों को विशेष मूल्यांकन की जरूरत होगी, उन्हें किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (एएफएलसी) भेजा जाएगा। गंभीर मामलों में मानसिक स्वास्थ्य क्लीनिक के माध्यम से क्लिनिकल मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों की सहायता ली जाएगी।

अभिभावकों को भी किया जाएगा जागरूक
इस पहल में अभिभावकों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। अभिभावक-शिक्षक बैठकों के दौरान माता-पिता को बच्चों की मनोदशा, व्यवहार, नींद और पढ़ाई में होने वाले बदलावों को समझने तथा उनसे सहज संवाद करने के बारे में जानकारी दी जाएगी। भागीदार स्कूलों में छात्र स्वास्थ्य राजदूत भी बनाए जाएंगे। वरिष्ठ विद्यार्थियों को ‘साथ समन्वयक’ के रूप में जिम्मेदारी दी जाएगी। उनकी भूमिका जागरूकता बढ़ाने और साथियों के बीच सहयोगपूर्ण संवाद को प्रोत्साहित करने तक सीमित रहेगी। वे किसी विद्यार्थी का निदान या उपचार नहीं करेंगे।

सरकार का लक्ष्य है कि इस पहल के माध्यम से स्कूलों में ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार किया जाए, जहां विद्यार्थी मानसिक तनाव या परेशानी की स्थिति में बिना झिझक मदद मांग सकें। कार्यक्रम के तहत एक वर्ष के भीतर सभी चिह्नित स्कूलों में कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

 

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