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राष्ट्रीय

निजी अंग पकड़ना और नाड़ा खींचना रेप का प्रयास… सुप्रीम कोर्ट ने पलटा इलाहाबाद HC का वो आदेश

19 फ़रवरी, 2026 11:37 AM

एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि किसी लड़की के पायजामे का नाड़ा खींचना और उसके निजी अंग पकड़ना केवल “बलात्कार की तैयारी” है, “बलात्कार का प्रयास” नहीं। शीर्ष अदालत ने इस तर्क को गलत ठहराते हुए साफ कहा कि इस तरह की हरकत मामूली नहीं है, बल्कि यह बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आ सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी नाबालिग लड़की के निजी अंग पकड़ना और उसके कपड़े से छेड़छाड़ करना गंभीर अपराध है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे फैसलों से समाज में गलत संदेश जा सकता है, इसलिए इसे सुधारना जरूरी था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।

हाईकोर्ट का क्या था फैसला?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 17 मार्च 2025 को सुनाए गए आदेश में कहा था कि निजी अंग पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना “बलात्कार की तैयारी” माना जाएगा, न कि “बलात्कार का प्रयास”। इस आधार पर आरोपियों को गंभीर धाराओं से राहत मिल गई थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

फिर से लागू हुईं सख्त धाराएं
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कासगंज की पॉक्सो कोर्ट का 23 जून 2023 का आदेश फिर से प्रभावी हो गया है। अब आरोपियों पर बलात्कार के प्रयास की धारा, पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धाराएं दोबारा लागू होंगी और उन्हीं के तहत मुकदमा चलेगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी सख्त टिप्पणियां केवल हाई कोर्ट के तर्क को गलत साबित करने के लिए थीं। इन्हें आरोपियों की दोषसिद्धि पर अंतिम राय न माना जाए।

क्या था पूरा मामला?
यह घटना 10 नवंबर 2021 की है। कासगंज में एक महिला अपनी 14 साल की बेटी के साथ घर लौट रही थी। रास्ते में गांव के तीन लोगों पवन, आकाश और अशोक ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि पवन ने मदद के बहाने लड़की को बाइक पर बैठा लिया। आगे जाकर पवन और आकाश ने उसके साथ छेड़छाड़ की, निजी अंगों को पकड़ा और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की। इस दौरान उसके पायजामे की डोरी भी तोड़ दी गई। शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, तो आरोपी तमंचा दिखाकर फरार हो गए।

कैसे पहुंचा मामला सुप्रीम कोर्ट?
घटना के बाद कासगंज की पॉक्सो कोर्ट में केस दर्ज हुआ। आरोपियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट के विवादित आदेश के बाद मामला चर्चा में आया और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए हस्तक्षेप किया। अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद आरोपियों पर फिर से गंभीर धाराओं में मुकदमा चलेगा। यह फैसला यौन अपराधों से जुड़े मामलों में कानून की सख्त व्याख्या के तौर पर देखा जा रहा है।

 

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