Infosys के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और सेवा प्रमुख विक्रम मेघल ने SEMICON India 2026 में कहा कि भारत के पास सेमीकंडक्टर और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पहले से मजबूत क्षमता है। इसका लाभ उठाकर देश दुनिया के लिए नवाचार और इंजीनियरिंग का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
उन्होंने कहा कि अभी तक भारत मुख्य रूप से यहां तैयार की गई इंजीनियरिंग से मिलने वाले लाभ तक सीमित रहा है। अब देश के लिए वैश्विक उत्पादों में नवाचार की हिस्सेदारी बढ़ाने और भारत में ही नए उत्पाद विकसित करने का अवसर है।
भारत के सामने तीन बड़े अवसर
मेघल ने भारत के लिए तीन प्रमुख अवसर बताए। इनमें घरेलू बाजार के लिए उत्पाद बनाना, वैश्विक कंपनियों के लिए इंजीनियरिंग सेवाएं देना और भारत में ही वैश्विक स्तर के उत्पाद विकसित करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि अगले चार से पांच वर्षों में भारत में मोबाइल फोन का बाजार 80 अरब डॉलर बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल मोबाइल फोन में घरेलू सामग्री की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत है। उनके अनुसार, केवल अलग-अलग पुर्जे बनाने के बजाय पूरे उत्पाद पर ध्यान देकर इस हिस्सेदारी को और बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में भी बड़ी संभावनाएं बताईं। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में खपत 14 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। वहीं, इंजीनियरिंग और अनुसंधान एवं विकास पर खर्च आने वाले वर्षों में मौजूदा स्तर से 1.8 गुना बढ़ने की उम्मीद है।
चिप से आगे पूरे उत्पाद पर ध्यान
मेघल ने कहा कि वैश्विक उत्पाद विकास का बाजार 67 अरब डॉलर से बढ़कर 200 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे भारत के पास नवाचार से पैदा होने वाली आर्थिक वैल्यू में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा कि भारत को केवल चिप बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे सिस्टम और उत्पाद के स्तर पर सोच विकसित करनी होगी। इसके लिए उत्पाद की योजना बनाने, पूरी तकनीक को समझने और उत्पाद से कमाई करने की क्षमता को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने वैश्विक बाजारों के लिए उत्पाद तैयार करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए नियमों का पालन करना भी महत्वपूर्ण बताया।
अगले दशक में स्वामित्व बढ़ाने पर जोर
मेघल ने कहा कि अगले दशक में भारत को अपनी मौजूदा क्षमताओं को उत्पादों और उनके परिणामों के स्वामित्व में बदलने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत को केवल चिप को अंतिम उत्पाद मानने के बजाय पूरे उत्पाद और उससे मिलने वाले परिणामों पर अपनी हिस्सेदारी और स्वामित्व बढ़ाना होगा।
उन्होंने इसके लिए दीर्घकालिक सोच के साथ कुछ बड़े क्षेत्रों में निवेश करने की जरूरत बताई। साथ ही, मजबूत वैश्विक सहयोग और उद्योग तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इससे भारत को नवाचार से पैदा होने वाली अधिक आर्थिक वैल्यू हासिल करने में मदद मिल सकती है।