चंडीगढ़ : गुरद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान पद को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब इस कड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी का मामला सामने आया है। हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व महासचिव जसवीर सिंह भाटी ने आरोप लगाया है कि गुरु घरों की सेवा संभाल और लंगर प्रबंधन तथा गुरु घरों के सेवादारों और स्टाफ की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। जिसकी मिसाल पिछले दिनों सरकारी दबाव के चलते महासचिव के पद पर दूसरी बार काबिज हुए गुरविंदर सिंह धमीजा ने दी। जसवीर सिंह भाटी ने कहा की गुरविंदर सिंह धमीजा अपनी शक्ति का नाजायज फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ही वाहन में श्री गुरुद्वारा ग्रंथ साहिब के 25 पावन स्वरूप रखकर कुरुक्षेत्र स्थित श्री गुरुद्वारा साहिब के कार्यालय के सकतर को दिए गए। क्योंकि उन्होंने अपना रौब जमाते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप उसी गाड़ी में रखने का दबाव बनाया और सूचना प्रधान पुष्कर तनेजाऔर कमेंट के प्रधान महंत करमजीत सिंह के मना करने पर भी इंदरजीत धमीजा बुरा भला बोलते हुए गुरु घर से चले गए। जसवीर सिंह भाटी ने कहा कि जिस महासचिव को यही नहीं पता कि गुण मर्यादा के मुताबिक एक वाहन में कितने स्वरूप ले जाए जा सकते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप को ले जाने की मर्यादा क्या है। ऐसे पदाधिकारी को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। जसवीर सिंह भाटी ने कहा कि यदि धमीजा के कहने पर 25 स्वरूप एक वाहन में लेकर ले जाए जाते तो बेअदबी का एक बड़ा जुर्म हो जाता। मगर एक गुरु घर के सकतर द्वारा इस कांड को होने से बचाया जा सका। उन्होंने कहा कि गुरविंदर सिंह धमीजा जैसे पदाधिकारी ना केवल गुरुजी की मर्यादा से अनजान है बल्कि वह सदस्य बनने के काबिल भी नहीं थे। मगर सरकार पर दबाव बनाकर उन्हें दूसरी बार महासचिव के पद पर बिठाया गया। उन्होंने मांग की कि पुरानी कमेटी के सभी सदस्य श्री गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी हरियाणा के प्रधान करमजीत सिंह से मांग करते हैं कि जल्दी कार्यकारिणी की बैठक बुलाकर गुरविंदर सिंह को महासचिव के पद से बर्खास्त किया जाए। उन्होंने सरकार से भी अपील की है कि जल्द से जल्द हरियाणा सिख गुरद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के आम चुनाव करवाए जाएं तथा सिख संगत द्वारा चुनी गई कमेटी को गुरुद्वारा साहिब की सेवा संभाल करवाई जाए।