Wednesday, September 09, 2026
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राष्ट्रीय

कोयला कंपनियों के लिए पहली सीएसआर रूपरेखा लॉन्च, 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरे

09 सितंबर, 2026 02:33 PM

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने मंगलवार को भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) रूपरेखा का शुभारंभ किया। इस मौके पर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की प्रमुख सीएसआर योजनाओं थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई) और नन्हा सा दिल के तहत 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट और 1,500 से अधिक सुधारात्मक हृदय सर्जरी पूरी होने की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया गया।

नई दिल्ली में आयोजित हुआ कार्यक्रम
कोयला मंत्रालय ने सीआईएल के साथ मिलकर नई दिल्ली में कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, कार्यान्वयन भागीदार और लाभार्थी परिवार शामिल हुए।

चार अस्पतालों से 21 अस्पतालों तक पहुंची टीबीएसवाई
थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए शुरू की गई थैलेसीमिया बाल सेवा योजना का नेटवर्क शुरुआती चार अस्पतालों से बढ़कर 21 सूचीबद्ध अस्पतालों तक पहुंच गया है। सीआईएल भारत का एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है जिसने इन दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों के लिए इस स्तर की स्वास्थ्य सेवा पहल शुरू की है।

बीएमटी के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता
योजना के तहत चार चरणों में कुल 130 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपए तक की सहायता दी जाती है। यह राशि सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाती है। अब तक 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरे किए जा चुके हैं और उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों में से बड़ी संख्या अब सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी रही है। योजना का क्रियान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निगरानी मार्गदर्शन में थैलेसीमिक्स इंडिया के समन्वय से किया जा रहा है।

जन्मजात हृदय दोष के इलाज के लिए नन्हा सा दिल
जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए सीआईएल ने नन्हा सा दिल पहल शुरू की है। अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल करीब 2.4 लाख नवजात बच्चे जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित होते हैं, जबकि इनमें से केवल करीब 5% को समय पर उपचार मिल पाता है।

दो लाख से अधिक बच्चों की जांच
मार्च 2024 में झारखंड के चार जिलों से श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ साझेदारी में शुरू हुई इस पहल का बाद में सीआईएल की सहायक कंपनियों एसईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और डब्ल्यूसीएल तक विस्तार किया गया। आधुनिक नैदानिक उपकरणों की मदद से अब तक दो लाख से अधिक बच्चों की जांच की जा चुकी है और 1,500 से अधिक सुधारात्मक हृदय सर्जरी की गई हैं। मरीजों के परिवारों के लिए उपचार पूरी तरह निशुल्क है और इसमें यात्रा तथा अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी शामिल है।

कोयला क्षेत्र के लिए पहली सीएसआर रूपरेखा
कोयला मंत्रालय ने परिणामोन्मुख सीएसआर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कोयला क्षेत्र के लिए व्यापक सीएसआर रूपरेखा शुरू की है। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत वैधानिक सीएसआर व्यवस्था लागू होने के बाद यह कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट रूपरेखा है। इसे भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) ने तैयार किया है। यह कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लाभ के लिए प्रभावशाली और परिणामोन्मुख सीएसआर पहलों के लिए मार्गदर्शक ढांचे के रूप में काम करेगी।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सीआईएल के प्रयासों की सराहना
जी. किशन रेड्डी ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में सीआईएल की निरंतर सीएसआर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने थैलेसीमिया बाल सेवा योजना, नन्हा सा दिल और एसईसीएल की सुश्रुत जैसी प्रमुख पहलों की सराहना की।

बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने थैलेसीमिया और जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के हित में केंद्र और राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों तथा अभिभावक संघों समेत समाज के सभी वर्गों की सहभागिता वाले दृष्टिकोण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने लाभार्थी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी शैक्षिक जरूरतों में सहयोग का भी आश्वासन दिया।

हर बच्चे को बेहतर इलाज का अवसर मिले
कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को बेहतर उपचार, आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने थैलेसीमिया के उपचार और प्रभावित परिवारों को सहायता देने के लिए सीआईएल की सीएसआर पहलों की सराहना की।

सीएसआर पहलों का परिवर्तनकारी प्रभाव
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों तक जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में सीआईएल की सीएसआर पहलों के प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने डॉक्टरों, सूचीबद्ध अस्पतालों और भागीदार संगठनों के योगदान की सराहना करते हुए गुणवत्ता-सुनिश्चित देखभाल, वास्तविक समय में मामलों की निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और विस्तार क्षमता को इन पहलों की प्रमुख विशेषताएं बताया।

स्थानीय जरूरतों पर आधारित हो सीएसआर
कोयला मंत्रालय की अपर सचिव रुपिंदर बरार ने कहा कि सीएसआर की वास्तविक भावना लोगों के जीवन को छूने, समुदायों को सशक्त बनाने और जरूरतमंद लोगों के लिए अवसर पैदा करने में निहित है। उन्होंने कहा कि सीएसआर हस्तक्षेप स्थानीय जरूरतों पर आधारित और सुविचारित योजना से समर्थित होने चाहिए तथा उनके परिणामों का ठोस उपलब्धियों के आधार पर आकलन किया जाना चाहिए।

जमीनी स्तर तक पहुंचे सीएसआर का लाभ
रुपिंदर बरार ने कहा कि नई सीएसआर रूपरेखा कोयला क्षेत्र में सामाजिक जिम्मेदारी के कार्यों को अधिक संरचित, पारदर्शी और प्रभावोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि प्रत्येक पहल का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे और मजबूत, स्वस्थ एवं सशक्त समुदायों के निर्माण में योगदान दे।

हर साल 10 हजार से अधिक बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं
मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के ट्रांसप्लांट यूनिट प्रमुख डॉ. शांतनु सेन ने कहा कि भारत में हर वर्ष 10 हजार से अधिक बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं। इन बच्चों का जीवन नियमित रक्त आधान पर निर्भर रहता है और इसके बावजूद कई बच्चे लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाते।

बीएमटी बेहद महंगा उपचार
डॉ. सेन ने बताया कि वर्तमान में थैलेसीमिया के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट एकमात्र उपलब्ध उपचार है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीएमटी का अत्यधिक महंगा होना है। उन्होंने चिकित्सा समुदाय की ओर से थैलेसीमिया बाल सेवा योजना के जरिए इस जीवनरक्षक उपचार को जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने के लिए सीआईएल का आभार व्यक्त किया।

लाभार्थी परिवारों ने जताया आभार
लाभार्थी बच्चों और उनके परिवारों ने सीआईएल, कोयला मंत्रालय, डॉक्टरों, अस्पतालों और भागीदार संगठनों के सहयोग के लिए आभार जताया। बच्चों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समय पर उपचार ने उन्हें नई आशा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर देखने का अवसर दिया है।

उपलब्धियों के साथ मानवीय असर भी सामने आया
कार्यक्रम में लाभार्थी बच्चों और परिवारों के अनुभवों ने सीएसआर पहलों के मानवीय प्रभाव को सामने रखा। वक्ताओं ने कहा कि इन योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों और परियोजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उपचार के बाद बच्चों के जीवन में आए बदलाव और उनके भविष्य के प्रति बढ़े आत्मविश्वास में भी दिखाई देती है।

पुस्तक का विमोचन और लघु फिल्मों का प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान थैलेसीमिया बाल सेवा योजना पर एक पुस्तक का विमोचन किया गया। स्वास्थ्य क्षेत्र में सीआईएल की सीएसआर पहलों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी हुआ। इसके अलावा डॉक्टरों और विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान तथा लाभार्थी परिवारों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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