नई दिल्ली(एजेंसी) : अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन क्षमता विकसित की है।
एथेंस में ग्रीस के विदेश मंत्री जियोर्गोस गेरापेत्रितिस के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो ने कहा कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने को लेकर अमेरिका का रुख स्पष्ट है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी समझौते के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन की कितनी अनुमति दी जा सकती है, इस पर वह कोई निश्चित सीमा बताने की स्थिति में नहीं हैं।
रुबियो ने कहा, “ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता। बात खत्म।”
रुबियो ने कहा कि बातचीत में अमेरिका के लिए स्वीकार्य कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। वह उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की उन टिप्पणियों से जुड़े सवाल का जवाब दे रहे थे, जिनमें वेंस ने ईरान की परमाणु संवर्धन क्षमता को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई थी।
रुबियो ने दावा किया कि ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर संभावित हमलों को रोकने के लिए अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमता को काफी बढ़ाने की कोशिश की। उनके अनुसार, ईरान ने इतनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता विकसित करने का प्रयास किया कि उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने की कोशिश करने वाले देशों को भारी जवाबी कार्रवाई का खतरा बना रहे।
उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान को इस स्थिति तक पहुंचने से रोकने के लिए कार्रवाई की है। रुबियो ने दावा किया कि ट्रंप ने ईरान की ड्रोन और मिसाइल क्षमता को नुकसान पहुंचाया, उसके नौसैनिक और वायु सैन्य ढांचे को भी नष्ट किया।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान की सैन्य क्षमताओं को हुए नुकसान की रुबियो द्वारा बताई गई सीमा की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई। रुबियो ने कहा कि ईरान की सैन्य स्थिति में काफी गिरावट आई है और अब वह अपने परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ कार्रवाई को रोकने के लिए अपनी पारंपरिक सैन्य ताकत पर पहले की तरह निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा, “ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा, जब तक राष्ट्रपति ट्रंप पद पर हैं।”
रुबियो ने ईरान की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई और इसके लिए वहां के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से ईरान पर भारी दबाव पड़ रहा है और आने वाले समय में उसकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान का नेतृत्व देश के बुनियादी ढांचे और जनता के कल्याण पर खर्च करने के बजाय विदेशों में सक्रिय सशस्त्र समूहों को संसाधन उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने हिजबुल्लाह, हमास, हूती और इराक से संचालित मिलिशिया का नाम लेते हुए कहा कि इन्हें ईरान से आर्थिक सहायता मिलती है।
रुबियो ने यह भी कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और इसके जरिए तेल की आवाजाही संघर्ष से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि अब वहां से लगभग उतना ही तेल बाहर जा रहा है, जितना संघर्ष शुरू होने से पहले जा रहा था।
रुबियो की ये टिप्पणियां ग्रीस के साथ समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और मध्य पूर्व में अस्थिरता के प्रभावों पर हुई चर्चा के दौरान आईं।