मध्य पूर्व और यूक्रेन में जारी युद्धों के कारण यूरोप में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे लोगों, कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए यूरोपीय देश सब्सिडी, टैक्स कटौती और नीतियों में बदलाव जैसे कदम उठा रहे हैं।
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के अनुसार, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दुनियाभर की सरकारों ने ऊर्जा आपूर्ति में कमी और बढ़ती ईंधन कीमतों के आर्थिक असर को सीमित करने के लिए हस्तक्षेप किया है। आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए सबसे सक्रिय 10 देशों में से सात यूरोपीय संघ (EU) के हैं।
यूरोप के अलग-अलग देशों ने राहत के लिए अलग-अलग कदम उठाए हैं। लिथुआनिया ने ट्रेन टिकटों की कीमत आधी कर दी है। ग्रीस जुए से मिलने वाले कर राजस्व का इस्तेमाल राहत उपायों के लिए कर रहा है। इटली ने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को बंद करने की योजना टाल दी है और तेल एवं प्राकृतिक गैस परियोजनाओं के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई कम की है। नीदरलैंड ने घरों में ऊर्जा बचाने वाली सेवाओं के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई है। पोलैंड ने कुछ ईंधन उत्पादकों और विक्रेताओं के रिकॉर्ड मुनाफे पर ज्यादा कर लगाने का प्रस्ताव रखा है।
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया था और यूरोप में ऊर्जा संकट बढ़ाया था। यूरोपीय संघ अपने इस्तेमाल होने वाले लगभग पूरे तेल और 85 प्रतिशत प्राकृतिक गैस का आयात करता है। EU की कुल ऊर्जा जरूरतों का करीब 57 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है।
कुछ यूरोपीय देशों में पेट्रोल पंपों पर कीमतें 12 डॉलर प्रति गैलन के बराबर से भी ऊपर पहुंच गई हैं। यूरोपीय संगठन ट्रांसपोर्ट एंड एनवायरनमेंट के अनुसार, केवल डीजल पर ही यूरोपीय संघ के नागरिक रोजाना अतिरिक्त 20.3 करोड़ यूरो खर्च कर रहे हैं।
यूरोपीय संघ के नेताओं ने सदस्य देशों को घरों और कृषि, परिवहन तथा मछली पकड़ने जैसे ऊर्जा-गहन क्षेत्रों को अस्थायी सरकारी सहायता देने की अनुमति दी है। साथ ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आयातित तेल व प्राकृतिक गैस पर लंबे समय की निर्भरता कम करने वाले निवेश के लिए EU के खर्च नियमों में भी सीमित छूट दी गई है।
फ्रांस ने बढ़ती ईंधन कीमतों से राहत के लिए 45 करोड़ यूरो का नया पैकेज घोषित किया है। इसके तहत 30 किलोमीटर से ज्यादा की रोजाना यात्रा करके काम पर जाने वाले या पेशेवर काम के लिए सालाना 8,000 किलोमीटर से ज्यादा वाहन चलाने वाले लोगों के लिए सहायता का दायरा बढ़ाया गया है। सरकार के अनुसार, इससे 55 लाख कर्मचारी साल के अंत तक ईंधन खर्च के लिए 100 यूरो की सहायता पाने के पात्र होंगे।
फ्रांस ने किसानों, मछुआरों और निर्माण कंपनियों के लिए ईंधन सब्सिडी भी साल के अंत तक बढ़ा दी है। इसके अलावा 58 लाख परिवारों को सर्दियों के ऊर्जा बिलों में मदद के लिए 48 से 277 यूरो तक के ऊर्जा वाउचर तीन महीने पहले उपलब्ध कराए जाएंगे।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूरोपीय आयोग से ईंधन की गुणवत्ता से जुड़े कुछ नियमों में ढील देने को कहा है, ताकि यूरोप में डीजल और विमान ईंधन का उत्पादन बढ़ाया जा सके। उन्होंने सामान्य डीजल में पारंपरिक बायोडीजल की अधिकतम सीमा 7 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का भी आग्रह किया है।
जर्मनी में जून के अंत में खत्म हुई दो महीने की ईंधन टैक्स कटौती को फिर से लागू करने का फैसला किया गया है। 1 अक्टूबर से साल के अंत तक पेट्रोल और डीजल पर कर में 17 सेंट प्रति लीटर की कमी की जाएगी। सरकार के अनुसार, इस कदम पर 250 करोड़ यूरो खर्च होंगे। सरकार तेल कंपनियों के साथ 1 जनवरी से ईंधन की कीमतों पर अधिकतम सीमा तय करने को लेकर भी बातचीत करेगी।
स्पेन ने भी मार्च में लागू पेट्रोल और डीजल टैक्स कटौती को बढ़ा दिया है। यह कदम ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों पर पड़े असर से निपटने के लिए घोषित 5 अरब यूरो के पैकेज का हिस्सा है। इस महीने कर में 5 सेंट प्रति लीटर की कमी है और यदि ईंधन की कीमतों में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि होती है तो यह राहत बढ़कर 20 सेंट प्रति लीटर हो सकती है। परिवहन कंपनियों, किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के लिए ईंधन सब्सिडी भी बढ़ाई गई है।
यूरोपीय देशों ने राहत योजनाओं के साथ अपनी रणनीतिक तेल भंडार का भी इस्तेमाल किया है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के 32 सदस्य देशों के उस समझौते का हिस्सा है, जिसके तहत आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उपलब्ध कराया जाना है।
EU रूस से ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और उद्योगों तथा अन्य प्रणालियों को जीवाश्म ईंधन से बिजली आधारित व्यवस्था में बदलने की कोशिश कर रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के अनुसार, अधिक विद्युतीकरण से 2040 तक EU के तेल, गैस और अन्य जीवाश्म ईंधन के आयात बिल में सालाना 260 अरब यूरो तक की कमी आ सकती है।
रूस से ऊर्जा आयात कम करने की कोशिश के दौरान यूरोप की अमेरिका पर निर्भरता बढ़ी है। वॉन डेर लेयेन ने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत EU ने तीन वर्षों में 750 अरब डॉलर की अमेरिकी ऊर्जा खरीद की प्रतिबद्धता जताई थी।
ईरान युद्ध के बाद अमेरिका से डीजल पर यूरोप की निर्भरता और बढ़ गई है। ऐसे में ट्रंप की अमेरिकी डीजल निर्यात पर रोक लगाने की संभावना ने यूरोपीय संघ की चिंता बढ़ा दी है। EU का कहना है कि इससे उसे डीजल के लिए दूसरे स्रोत तलाशने पड़ सकते हैं। यूरोपीय आयोग अमेरिका से इस विचार को छोड़ने की अपील कर रहा है।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच ऊर्जा सहयोग मजबूत, स्थिर और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है तथा इसमें किसी भी तरह की बाधा से दोनों पक्ष प्रभावित हो सकते हैं।