एशविले में G20 वित्त बैठकों से पहले अमेरिका ने भारत के साथ आर्थिक रिश्तों को और गहरा करने का संकेत दिया है। इस क्रम में ट्रेजरी विभाग भारतीय कंपनियों को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया समझने में मदद करने के लिए तैयार है।
भारत को अहम साझेदार मानते हुए निवेश चर्चा का स्वागत
ट्रेजरी के असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस पिलकर्टन ने कहा है कि वे भारतीय अधिकारियों और कंपनियों से मिलकर कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द यूनाइटेड स्टेट्स (CFIUS) प्रक्रिया के जरिए संभावित सहयोग के रास्ते तलाशने का अवसर देखते हैं। उन्होंने भारत को महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों का जिक्र किया।
पिलकर्टन ने स्पष्ट किया कि कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द यूनाइटेड स्टेट्स (CFIUS) विदेशी निवेशों की समीक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर करती है। यह पूंजी के स्रोत देश को लेकर पूर्वाग्रह नहीं रखती और हर मामले का अलग-अलग आकलन करती है। लगभग 90 प्रतिशत सौदों को मंजूरी मिल जाती है। कुछ मामलों में सुरक्षा जोखिमों को दूर करने के उपाय लागू करने के बाद हरी झंडी दी जाती है।
विदेशी निवेश से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदा
अधिकारी ने बताया कि स्वीकृत विदेशी निवेश अमेरिकी समुदायों में आर्थिक विकास, रोजगार विस्तार और स्थानीय व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा करते हैं। वे सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर न सिर्फ नवीन तकनीकों बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी निवेश के मौके बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के बावजूद पिलकर्टन ने कहा कि इसका मतलब अमेरिका अकेला नहीं है। वाशिंगटन साझेदार देशों के साथ आपसी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहता है।
G20 बैठकों में फोकस रहेगा विकास, सप्लाई चेन और तकनीक
एशविले बैठकों में वैश्विक विकास, व्यापार असंतुलन, मजबूत सप्लाई चेन और निवेश पर चर्चा होने की उम्मीद है। पिलकर्टन ने भारत से जुड़े किसी खास आर्थिक परिणाम की भविष्यवाणी करने से परहेज किया, लेकिन आर्थिक विकास को हर लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। अमेरिकी अधिकारी भारतीय प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के लिए उत्सुक हैं। बैठकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाइपरसोनिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और स्पेस इकॉनमी जैसे क्षेत्रों पर भी नजर रहेगी।
वाशिंगटन संवेदनशील तकनीकों के दोहरे इस्तेमाल से बचाव करते हुए साझेदारों के साथ सुरक्षित सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका ने आर्थिक-रणनीतिक संबंधों को मजबूत किया है। अहम और उभरती तकनीकों में सहयोग, सुरक्षित सप्लाई चेन तथा हाई-टेक क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों की प्राथमिकता बनी हुई है।