बीबीएन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का वार्षिक समारोह शनिवार को होटल ललित में मनाया गया। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान मुख्यातिथि व विशेषातिथि विधायक रामकुमार चौधरी रहे। संगठन के अध्यक्ष वाईएस गुलेरिया ने सालाना रिपोर्ट पढ़ी। उन्होने कहा कि बीबीएन के बहुत सारे मुद्दे अभी लंबित हैं, जिन पर काम होना है। आधारभूत ढांचे को सशक्त बनाने के लिए बहुत प्रयास बाकी हैं। सदस्य डा. अशोक कुमार ने बीबीएन में बिगड़ती कानून व्यवस्था की ओर उद्योग मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।
इस मौके पर उद्योग मंत्री ने कहा कि हम चाहते हैं कि उद्योगों को राहत दें, लेकिन सरकार विभिन्न कारणों से वित्तीय संकट से जूझ रही है। हम कोशिश कर रहे हैं कि वित्तीय स्थिति सुधरे, जिसमें मुख्यमंत्री के प्रयासों से सुधार भी हुआ है। उन्होंने माना कि विभिन्न टैक्सों व सैस की वजह से प्रदेश के कारखानों को महंगी बिजली मिल रही है। सरकार विचार कर रही है कि कारखानों को सस्ती बिजली मिले। यह सौगात हिमाचली कंपनियों को मार्च से मिलेगी, ऐसा हमारी सरकार का वायदा है। उन्होंने दावा किया कि मैडीकल डिवाइस पार्क नालागढ़ व बल्क ड्रग पार्क हरोली समयबद्ध तरीके पर प्रारंभ किए जाएंगे और हिमाचल में कार्यरत उद्यमियों को प्राथमिकता के आधार पर प्लाॅट दिए जाएंगे। महामंत्री रजनीश बिज ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
इस दौरान राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में उद्योगों का योगदान और इसे बनाए रखने की चुनौतियां विषय पर चर्चा के दौरान उद्योग जगत से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। इनमें एमएसएमई इकाइयों फायर विभाग की ओर से एनओसी, बिजली की बढ़ती लागत व ओवरलोड हो रहे विद्युत सब-स्टेशनों की समस्या के अलावा विद्युत ढांचे को मजबूत करना प्रमुख रहीं। इसके अलावा सड़कों की खराब स्थिति, स्वच्छता और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था में सुधार के मुद्दे उठाए। पिंजौर-नालागढ़ हाईवे और बद्दी-चंडीगढ़ रेल कनैक्टीविटी के कार्य में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
उद्योग संघ ने बताया कि पड़ोसी क्षेत्रों की तुलना में बीबीएन में माल ढुलाई (फ्रैट) की लागत करीब 30 से 40 प्रतिशत अधिक है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होती है। संरक्षक राजेंद्र गुलेरिया व शैलेष अग्रवाल ने बताया कि बैठक में राज्य की नई औद्योगिक नीति को लेकर भी चर्चा की गई तथा उद्योगों के हितों और मौजूदा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नीति तैयार करने पर जोर दिया गया।