हरियाणा में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव को लेकर कांग्रेस ने गंभीर चिंता जताई है। हरियाणा कांग्रेस मामलों के प्रदेश प्रभारी संजय दत्त ने कहा कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम प्रक्रिया की जल्दबाजी में नहीं हटना चाहिए। संजय दत्त ने कहा कि अभियान शुरू होने के समय प्रदेश के 90 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 2.06 करोड़ मतदाता दर्ज थे। SIR के पहले चरण में करीब 33.84 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में दर्ज नहीं हो पाए, जिनमें स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, अनुपस्थित, डुप्लीकेट अथवा अन्य कारणों से रिकॉर्ड में नहीं आए मतदाता शामिल थे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा बड़ी संख्या में नोटिस जारी किए गए हैं और इन मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया अभी जारी है। वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार दावों एवं आपत्तियों का निपटारा 28 अक्टूबर 2026 तक किया जाना है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 6 नवंबर 2026 को प्रकाशित होनी है।
संजय दत्त ने कहा कि यदि हजारों-लाखों मतदाताओं से जुड़े मामलों में सुनवाई लंबित है, तो उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है।प्रत्येक पात्र मतदाता को अपने नाम एवं विवरण की जांच कराने तथा त्रुटि होने पर उसे ठीक कराने का पूरा अवसर दिया जाए।
संजय दत्त ने कहा कि कांग्रेस यह सुनिश्चित करने के लिए आवाज उठाती रहेगी कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल प्रक्रिया में देरी, दस्तावेजी कमी अथवा अन्य तकनीकी कारणों से मतदाता सूची से बाहर न हो।
SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और हर मतदाता को पूरा अवसर मिले : राव नरेंद्र सिंह
हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव सामने आए हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से हो और प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिले।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि SIR की शुरुआत के समय प्रदेश में करीब 2.06 करोड़ मतदाता दर्ज थे। पहले चरण के बाद करीब 33.84 लाख मतदाताओं के नाम रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाए। चुनाव आयोग के अनुसार इनमें स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, अनुपस्थित और अन्य कारणों से रिकॉर्ड में शामिल न हो पाने वाले मतदाता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल आंकड़ों के आधार पर किसी मतदाता के नाम को हटाना उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति की जांच और संबंधित नागरिक को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना आवश्यक है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि 28 अक्टूबर तक नोटिस एवं दावों-आपत्तियों का निपटारा और उसके बाद 6 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन निर्धारित है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर चल रही प्रक्रिया में प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित जांच और सुनवाई के सूची से बाहर न हो।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार और निर्वाचन आयोग से मांग करती है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और पर्याप्त समय सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से गरीब, मजदूर, ग्रामीण, बुजुर्ग और ऐसे नागरिक जो दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई महसूस करते हैं, उनके लिए पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना दावा प्रस्तुत करने तथा अपनी आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाए।