शिमला : महिला एवं बाल विकास विभाग ने क्रैच, प्ले स्कूल, डे केयर सैंटर व किंडर गार्डन, नर्सरी व बालवाड़ी के लिए एडवाइजरी जारी की है। ऐसे में इन सैंटर को उक्त नियमों के तहत ही सैंटर संचालित करने होंगे। सैंटर में तीन से छह वर्ष के बच्चों की क्लास में 20 छात्र और तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों की क्लास में 10 से ज्यादा छात्र इनरोल होंगे। साथ ही बच्चे की एडमिशन के दौरान बच्चों और अभिभावकों के इंटरव्यू भी नहीं लिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि राजधानी के अभिभावकों का एक प्रतिनिधिमंडल विभाग के अधिकारियों से मिला। इस दौरान उन्होंने विभाग को अवगत करवाया है कि शिमला के कई स्कूल ईसीसीई अधिनियम के प्रावधानों का पालन किए बिना ईसीसीई केंद्र चला रहे हैं, जिससे 3-6 वर्ष की आयु के बच्चों के समग्र विकास और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
इसी को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से स्कूलों को उक्त एडवाइजरी जारी की है। हालांकि हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा केंद्र (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2017 को अधिसूचित किया है, जिसे हिमाचल प्रदेश राजपत्र, 13 दिसम्बर, 2018 में प्रकाशित किया गया। यह अधिनियम प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) केंद्र जैसे क्रैच, प्ले स्कूल, डे केयर सैंटर, या किंडरगार्टन, नर्सरी स्कूल या बालवाड़ी के पंजीकरण और विनियमन को नियंत्रित करता है। सूत्रों की मानें तो विभाग ईसीसीई नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, ताकि उपर्युक्त अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। इस दौरान सैंटर को इनडोर और आऊटडोर गतिविधियों के संचालन के लिए सामग्री का प्रावधान करना होगा। बच्चों के लिए प्रशिक्षित स्टाफ रखना होगा।
बच्चे का कोई लिखित या मौखिक परीक्षा या परीक्षण नहीं लिया जाएगा, लेकिन बच्चे की वृद्धि और विकास का आकलन करने के लिए केवल ग्रेडिंग मापदंडों का पालन किया जाएगा। केंद्रों के भवन बच्चों के लिए सुरक्षित होने चाहिए। आसपास का वातावरण स्वच्छ हो, बच्चों के सुरक्षित पेयजल सुविधा का प्रावधान हो, बच्चों के लिए अलग शौचालय, हाथ धोने की सुविधा हो, हैंडवॉश का प्रावधान हो, प्राथमिक चिकित्सा और चिकित्सा किट की सुविधा, केंद्र परिसर में किसी भी व्यक्ति, स्टाफ सदस्य या बाहरी व्यक्ति द्वारा किसी भी बच्चे के साथ दुर्व्यवहार या शोषण नहीं किया जाएगा। केंद्र में किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न नहीं दिया जा सकेगा। ईसीसीई केंद्र के कर्मचारियों की नियुक्ति उचित चिकित्सा जांच और पुलिस सत्यापन के बाद की जाएगी। परिसर में चाइल्ड हैल्पलाइन (1098) का टैलीफोन नंबर और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम, 2012 के प्रावधानों को केंद्र के परिसर में प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य होगा और इसके बारे में माता-पिता और कर्मचारियों को भी जानकारी दी जाएगी।