चंडीगढ़ : पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की लंबी कतारों और इमरजेंसी पर बढ़ते दबाव के बीच संस्थान ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत दी है। अब पीजीआई कर्मचारियों और उनके निकट संबंधियों के लिए इमरजेंसी वार्ड में 12 बेड आरक्षित किए गए हैं। यह सुविधा फिलहाल इमरजेंसी में शुरू की गई है और भविष्य में इसे कार्डियक सेंटर तक भी विस्तारित किया जाएगा।
परिजनों के लिए इमरजेंसी में 12 बेड निर्धारित
पीजीआई के कर्मचारी लंबे समय से अपने और परिवार के सदस्यों के लिए अलग चिकित्सा सुविधा की मांग कर रहे थे। पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और उनके निकट परिजनों के लिए इमरजेंसी में 12 बेड निर्धारित किए गए हैं तथा भविष्य में इस सुविधा को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के अलावा तकनीकी कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, लॉन्ड्री, रसोई और इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारी भी 24 घंटे मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। ऐसे में कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
1200 लंबित पदोन्नतियों पर भी हुई कार्रवाई
प्रो. विवेक लाल ने कर्मचारियों से जुड़ी एक अन्य लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करने की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 1,200 पदोन्नतियां वर्षों से लंबित थीं, जिनमें से कई मामले 1992 से लंबित थे। अब इन पदोन्नतियों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि समय पर पदोन्नति और कर्मचारी कल्याण संस्थान में वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए जरूरी है। इससे वे मरीजों की बेहतर देखभाल के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य कर सकेंगे।
कार्डियक इमरजेंसी में भी बढ़ेंगी सुविधाएं
पीजीआई में समर्पित कार्डियक इमरजेंसी अब पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही है। इस सुविधा से हृदय रोगियों को तेज और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने के साथ मरीजों के प्रबंधन में भी सुधार हुआ है। प्रो. विवेक लाल ने बताया कि कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए 12 बेड आरक्षित करने का फैसला इसी व्यवस्था का हिस्सा है। भविष्य में कार्डियक सेंटर के भीतर भी कर्मचारियों के लिए विशेष सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में उन्हें समय पर इलाज मिल सके। हर वर्ष करीब 30 लाख मरीज इलाज के लिए पीजीआई पहुंचते हैं। इतने बड़े मरीज भार के कारण संस्थान पर लगातार दबाव बना रहता है। इसके बावजूद कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण के बल पर पीजीआई बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।