बीमा क्लेम को लेकर ग्राहकों की परेशानी कम करने के लिए अब बीमा नियामक भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने सख्त नियम लागू किए हैं। नए निर्देशों के तहत बीमा कंपनियों को तय समय सीमा में क्लेम का निपटारा करना होगा और देरी होने पर बड़े अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। इससे करोड़ों पॉलिसीधारकों को तेज और पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद है।
IRDAI के नए नियमों के अनुसार अब बीमा कंपनियों को हर 15, 30 और 60 दिन के भीतर क्लेम की स्थिति ग्राहकों को बतानी होगी। कंपनियों को यह जानकारी देनी पड़ेगी कि कितने क्लेम मंजूर हुए, कितने खारिज किए गए और कितने मामलों में भुगतान लंबित है। इसका उद्देश्य ग्राहकों को बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने से राहत देना है।
कंपनी के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई
इसके अलावा, पॉलिसी में पता, मोबाइल नंबर या नॉमिनी बदलने जैसे काम अब 7 दिनों के भीतर पूरे करने होंगे। तय समय में बदलाव नहीं होने पर इसे शिकायत माना जाएगा और कंपनी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
नए नियमों में पहली बार बीमा कंपनियों के MD और CEO की जिम्मेदारी सीधे ग्राहक सेवा से जोड़ी गई है। अधिकारियों का बोनस और अतिरिक्त वेतन अब इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी कितनी तेजी और पारदर्शिता से क्लेम का निपटारा कर रही है। अगर कंपनी जरूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करती या ग्राहकों को सही अपडेट नहीं देती, तो वरिष्ठ अधिकारियों का बोनस रोका जा सकता है।
IRDAI ने कंपनियों के लिए तय किए छह बड़े मानदंड
IRDAI ने कंपनियों के कामकाज की निगरानी के लिए छह बड़े मानदंड भी तय किए हैं। इनमें कंपनी की आर्थिक स्थिति, पॉलिसी की स्पष्ट जानकारी, क्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड, शिकायत निपटान, लेखा मानकों का पालन और ग्राहकों को गुमराह करने वाले तरीकों पर नजर रखी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से बीमा क्लेम प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और तेज होगी। ग्राहकों को समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी और कंपनियों पर पारदर्शिता बनाए रखने का दबाव रहेगा।