शिमला हिमाचल प्रदेश में मानसून ने रेड अलर्ट के बीच भारी तबाही मची है। इस बार कुल्लू और मनाली में बड़ा नुकसान हुआ है, जिससे लोग सहमे हुए हैं। पिछले 24 घंटों में प्रदेश में बरसात के चलते सात और लोगों की जान चली गई है। इसमें बिलासपुर में एक, कांगड़ा में एक, किन्नौर में दो और सोलन में तीन मौतें दर्ज की गई हैं। प्रदेश में बरसात के कारण मौतों का कुल आंकड़ा 310 तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए मंडी और शिमला जिला के कुछ स्थानों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है, जबकि दूसरे जिलों में भी हलकी और मध्यम बारिश होने की आशंका है। फिलहाल प्रदेश में तीन एनएच सहित कुल 677 सडक़ों पर आवाजाही पूरी तरह से बाधित है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार रात से मची तबाही के कारण कुल्लू व मनाली में 28 से ज्यादा घर, दुकानें और रेस्टोरेंट ब्यास नदी व दूसरे नालों में समा गए। 40 से अधिक घरों पर अभी भी खतरा मंडरा रहा है। कुल्लू के अखाड़ा बाजार में दो घर, ओल्ड मनाली में छह ढाबे व तीन घर, रामशीला में तीन मकान, बाहंग में दो रेस्टोरेंट और चार दुकानें पानी में बह गए हैं। कुल्लू में ब्यास का पानी डोहलू टोल प्लाजा तक पहुंच गया। कुल्लू और मनाली के बीच सडक़ जगह-जगह ब्यास नदी में समा गई है। इससे मनाली का कुल्लू जिला मुख्यालय से पूरी तरह संपर्क कट चुका है। मनाली में बेली ब्रिज के साथ लेफ्ट बैंक ब्रिज बह गया और ओल्ड मनाली को जोडऩे वाला पुल भी बह गया है। ब्यास के तेज बहाव से ग्रीन टैक्स बैरियर के पास सडक़ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है, जबकि बिंदु ढांक के पास मनाली-लेह मार्ग का एक हिस्सा नदी में समा गया।
कुल्लू की तरह मंडी में भी ब्यास नदी भारी नुकसान कर रही है। ब्यास का पानी पंचवक्त्र मंदिर के प्रांगण तक पहुंच गया। यहां पर भयूली कॉलोनी से लगभग 40 लोगों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। मंडी के बालीचौकी में सोमवार देर रात जमीन धंसने के बाद दो बिल्डिंग गिर गईं। इन बिल्डिंगों में 40 से ज्यादा दुकानें चल रही थीं। हादसे की आशंका को देखते हुए दोनों बिल्डिंगों को पांच दिन पहले ही खाली करवा लिया गया था। मंडी में दवाड़ा पुल भी नदी में समा चुका है। मंडी में डैहर पावर हाउस की टरबाइन सिल्ट ने रोक दी है और 990 मेगावाट का यह पावर प्रोजेक्ट बंद हो गया है। इसके साथ ही सिल्ट ने पंडोह-बग्गी टनल को भी जाम कर दिया है। पंडोह डैम में ज्यादा पानी आने के बाद पांचों गेट एक साथ खोल दिए गए हैं। इसके चलते ब्यास उफान पर आ गई है। तेज बारिश के कारण ब्यास की साहयक नदियां तीर्थन, लारजी, ऊहल, पार्वती और सैंज भी उफान पर चल रही हैं। ब्यास का रौद्र रूप देखकर मंडी प्रशासन अलर्ट हो गया है। उधर, चंबा जिला में सडक़ सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ी हुई हैं। मंगलवार को जिला मुख्यालय में मोबाइल व इंटरनेट सेवाएं बंद रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सिहुंता-चुवाड़ी, लाहुल-चुवाड़ी के अलावा जोत मार्ग तथा बनीखेत-चंबा और चंबा-तीसा मार्ग भी बंद पड़े हुए हैं। रास्ते बंद होने से मणिमहेश यात्री जगह-जगह फंसे हुए हैं। उधर, लाहुल-स्पीति की चंद्रताल में बर्फबारी का समाचार है। शिंकुला दर्रे पर भी हिमपात का क्रम जारी है। राज्य की 677 सडक़ें यातायात के लिए पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। इनके साथ नेशनल हाइवे नंबर 03, 05 और 305 भी बंद हैं। राज्य में 1413 बिजली ट्रंासफार्मर बंद हो चुके हैं, वहीं 420 पेयजल योजनाएं बाधित हैं। राज्य में बरसात के चलते नुकसान का आंकड़ा 2454 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके साथ ही प्रदेश में बरसात से होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा 310 तक पहुंच गया है। इनमें से बिलासपुर में 15, चंबा में 36, हमीरपुर में 16, कांगड़ा में 49, किन्नौर में 28, कुल्लू में 26, लाहुल-स्पीति में आठ, मंडी में 51, शिमला में 28, सिरमौर में 14, सोलन में 21 व ऊना में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सडक़ हादसों के शिकार लोग भी शामिल हैं।