प्रदेश का राजस्व अनुदान घाटा बंद होने के बाद भी राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए है। सोमवार को मांगों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मिलने पहुंचे हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के एक प्रतिनिधिमंडल के समक्ष यह बात कही। फ्रंट के अध्यक्ष आत्मा राम की अगवाई में यह प्रतिनिधिमंडल मिला है। जानकारी के अनुसार सोमवार को प्रदेश पेंशनर्स ज्वाइंट फ्रंट के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को सीएम से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से सीएम को अवगत करवाया और एक मांग पत्र भी सौंपा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन देते हुए कहा कि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में वित्तीय कठिनाइयों और आरडीजी बंद होने के बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों के कल्याण के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 1.36 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की, लेकिन केंद्र सरकार ने ओपीएस लागू करने के लिए 1600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता रोक दी है। सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों के संशोधित वेतनमान से जुड़ी सभी बकाया राशि का भुगतान कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने पहली जनवरी, 2016 से 31 जनवरी, 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण के सभी लंबित मामलों का निपटारा कर दिया है। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान और फ्रंट के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।