शिमला : हिमाचल की सुक्खू सरकार में हरित ऊर्जा को नई गति प्रदेश को मिली है। राज्य ने 2534 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर 1004 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त किया है। वर्तमान में राज्य सरकार पारंपरिक जलविद्युत क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और अन्य नवाचारों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अगले दो वर्षों में 500 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता की परियोजनाएं स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस दिशा में ऊना और बिलासपुर जिला में स्थापित पेखुबेला, भंजाल, अघलौर और बैरा डोल सौर परियोजनाएं उल्लेखनीय हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 52 मेगावाट है। इनसे अब तक लगभग 114.27 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन और 34.83 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रदेश में अभी भी जलविद्युत परियोजनाएं राज्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की आधारशिला बनी हुई हैं।
इस संदर्भ में कुल्लू जिला में स्थापित 100 मेगावाट क्षमता की सैंज जलविद्युत परियोजना, किन्नौर जिला में 65 मेगावाट की काशंग चरण-एक परियोजना तथा शिमला जिला में 111 मेगावाट की सावड़ा-कुड्डू परियोजना महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन परियोजनाओं से संयुक्त रूप से लगभग 2,419.97 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन और 969.95 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त 13 जलविद्युत परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्य की कुल उत्पादन क्षमता में 1,229 मेगावाट की वृद्धि हुई है। दूसरी ओर नालागढ़ में एक मेगावाट क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्र विकसित किया जा रहा है, जो भविष्य में स्वच्छ ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देगा। इसी प्रकार नेरी में देश का पहला राज्य समर्थित बायोचार कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है।
सौर ऊर्जा में निवेश
सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 250 किलोवाट से पांच मेगावाट तक की परियोजनाएं निवेशकों को दी जा रही हैं। परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड द्वारा खरीदा जाएगा। अब तक 547 निवेशकों को 595.97 मेगावाट क्षमता की ग्राउंड-माउंटेड सौर परियोजनाएं आबंटित की जा चुकी हैं। हिमऊर्जा के माध्यम से 728.4 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को आवंटित की गई हैं, जिनमें से 150.13 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं पर कार्य आरंभ हो चुका है।
प्रभावितों के हितों की रक्षा
जलविद्युत परियोजनाओं से प्रभावितों के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार ने 25.25 करोड़ की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है। इसके अलावा लघु जलविद्युत परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 25 मेगावाट तक की परियोजनाओं पर राज्य को मिलने वाली मुफ्त बिजली की रॉयल्टी दर को 18 और 30 से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया है। इस से निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को एक महत्त्वपूर्ण सफलता भी प्राप्त हुई है, जब सर्वोच्च न्यायालय ने कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना के रॉयल्टी विवाद में हिमाचल के पक्ष में निर्णय दिया।