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Air India Plane Crash: मेरे बेटे की छवि को मिट्टी में मिला दिया गया... हादसे में मारे गए पायलट के पिता का छलका दर्द

16 अक्टूबर, 2025 08:31 PM

नई दिल्ली : अहमदाबाद से उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के फ्लाइट AI171 के भीषण हादसे के बाद, अब इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस हादसे में जान गंवाने वाले अनुभवी पायलट कैप्टन सुमीत सबरवाल के पिता पुष्कराज सबरवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। 91 वर्षीय पिता का आरोप है कि इस दुर्घटना की जांच न केवल अपारदर्शी है, बल्कि जानबूझकर पायलट को दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है, जिससे कैप्टन सुमीत सबरवाल की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।


क्या है पूरा मामला?
12 जून 2025 को एयर इंडिया की बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (VT-ANB), जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए उड़ान भर रही थी, टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भीषण हादसे में विमान में सवार 260 लोगों की जान चली गई, जिनमें 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे।


अब सुप्रीम कोर्ट में गुहार
पुष्कराज सबरवाल और Federation of Indian Pilots (FIP) ने मिलकर 10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि: एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक निगरानी समिति (Court Monitored Committee) का गठन किया जाए, जिसमें स्वतंत्र विमानन और तकनीकी विशेषज्ञ हों। Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) द्वारा की गई अब तक की जांचों को बंद मानते हुए, सभी संबंधित साक्ष्य, डेटा और रिकॉर्ड को न्यायिक समिति को सौंपा जाए।


जांच पर गंभीर आरोप
-याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जांच में कई स्तर पर गंभीर खामियां हैं:
-बोइंग 787 के डिज़ाइन स्तर की संभावित खामियों की अनदेखी।
-ईंधन कटऑफ जैसी तकनीकी गतिविधियों को समझे बिना पायलट को दोषी ठहराना।
-जांच एजेंसी AAIB ने एक पूर्व निर्धारित धारणा के आधार पर रिपोर्ट तैयार की और स्वतंत्रता व निष्पक्षता से समझौता किया।
याचिका के अनुसार, यह रवैया ICAO Annex 13 जैसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करता है और भारत पर कानूनी और वैश्विक जिम्मेदारियों का बोझ डाल सकता है।


पिता की व्यथा: “मेरे बेटे की छवि को मिट्टी में मिला दिया गया है”
पुष्कराज सबरवाल ने इससे पहले 29 अगस्त को नागरिक उड्डयन सचिव और AAIB के महानिदेशक को पत्र लिखकर Rule 12 के तहत औपचारिक जांच की मांग की थी। उनका कहना है कि मीडिया में आई अफवाहों और लीक हुई जानकारी ने कैप्टन सबरवाल की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने लिखा: “मेरे बेटे को लेकर यह अफवाह फैलाई जा रही है कि वह मानसिक तनाव में था या आत्महत्या करने का इरादा रखता था। यह बातें झूठी, बेबुनियाद और अपमानजनक हैं।”


उन्होंने स्पष्ट किया कि: कैप्टन सबरवाल की मां की मृत्यु 3 साल पहले हुई थी, जबकि यह दावा किया गया कि वे हाल ही में गुजर गईं।वे 15 साल पहले तलाक ले चुके थे — और यह भी कारण नहीं हो सकता मानसिक अस्थिरता का। अपने करियर में उन्होंने 25 वर्षों में एक भी बड़ी दुर्घटना नहीं की थी। बोइंग 787 पर उनके पास 8,500+ घंटों का अनुभव था, और वे एक Line Training Captain थे।


AAIB की रिपोर्ट पर सवाल
AAIB की 12 जुलाई को जारी प्राथमिक रिपोर्ट में कहा गया था कि टेकऑफ के तुरंत बाद दोनों इंजनों की ईंधन सप्लाई लगभग एक ही समय में बंद हो गई, जिससे कॉकपिट में भ्रम की स्थिति बनी।
वॉयस रिकॉर्डर के हवाले से बताया गया कि एक पायलट दूसरे से पूछता है, “तुमने कटऑफ क्यों किया?” और जवाब आता है, “मैंने नहीं किया।”
लेकिन पुष्कराज का आरोप है कि यह रिपोर्ट:
तथ्यों को दरकिनार करती है,
निर्माता को पूरी तरह से क्लीन चिट देती है,
और पायलट को बिना ठोस आधार के जिम्मेदार ठहराती है।


क्या कहता है Rule 12?
Aircraft (Investigation of Accidents and Incidents) Rules, 2017 के Rule 12 के तहत, केंद्र सरकार यह तय कर सकती है कि किसी भी विमान दुर्घटना की परिस्थितियों की औपचारिक जांच आवश्यक है या नहीं। इस मामले में, पुष्कराज सबरवाल का कहना है कि इस नियम के तहत औपचारिक जांच शुरू न करना उनके मौलिक अधिकारों का हनन है, खासकर उनके बेटे की प्रतिष्ठा के अधिकार का, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।

 

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