चंडीगढ़ : केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती के ऐलान के बाद सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस मुद्दे पर हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया है। राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी में कटौती का सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचता नजर नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि पेट्रोल पंप पर उपभोक्ताओं को 10 रुपये प्रति लीटर की राहत मिलेगी। उनके अनुसार, यह राहत मुख्य रूप से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को दी गई है, जबकि आम जनता को अब भी लगभग वही कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का हवाला देते हुए कहा कि मई 2014 में जब कांग्रेस सरकार सत्ता से बाहर हुई, उस समय कच्चे तेल की कीमत 106.94 डॉलर प्रति बैरल थी। इसके बावजूद पेट्रोल लगभग 71 रुपये प्रति लीटर और डीजल करीब 56 रुपये प्रति लीटर के आसपास उपलब्ध था।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि इसके विपरीत हाल के वर्षों में, जब कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल रही, तब भी उपभोक्ताओं को पेट्रोल के लिए 90-95 रुपये प्रति लीटर तक भुगतान करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका मुख्य कारण केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पिछले साढ़े 11 वर्षों में बार-बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाना है।
उन्होंने दावा किया कि इस दौरान केंद्र सरकार ने 12 बार एक्साइज ड्यूटी में वृद्धि की, जिससे प्रतिदिन औसतन करीब 982 करोड़ रुपये की कमाई की गई। उन्होंने कहा कि इस पूरी अवधि में आम जनता को वास्तविक राहत नहीं मिली है और हालिया कटौती भी महज एक दिखावा साबित हो सकती है।
राव नरेंद्र सिंह ने सरकार की ऊर्जा नीति को “खोखली” करार देते हुए कहा कि यह नीति जनता पर आर्थिक बोझ डालकर उसे ही राहत का भ्रम देने का प्रयास है।
इसके साथ ही उन्होंने हरियाणा में सामने आ रहे कथित घोटालों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक घोटाले की गूंज शांत भी नहीं होती कि दूसरा मामला उजागर हो जाता है। उन्होंने यमुनानगर धान घोटाला, महेंद्रगढ़ सरसों बारदाना घोटाला, आईडीएफसी बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के मामले तथा नगर निगम पंचकूला के 160 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि यह भ्रष्ट तंत्र की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
उन्होंने आगे आशंका जताई कि प्रदेश के अन्य विभागों—जैसे शिक्षा विभाग, पॉल्यूशन कंट्रोल विभाग और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद—में भी इसी प्रकार की अनियमितताओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण जनता की खून-पसीने की कमाई अफसरशाही की जेबों में जा रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर जनता महंगाई की मार झेल रही है, वहीं एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में जनता को राहत देना चाहती है, तो उसे दिखावटी कदमों के बजाय ठोस और पारदर्शी नीतियां लागू करनी होंगी, जिससे आम उपभोक्ता को वास्तविक फायदा मिल सके।