एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने गुरुवार को 75 अरब डॉलर जुटाकर इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया। कंपनी का लक्ष्य 1.75 ट्रिलियन डॉलर के मूल्यांकन के साथ दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल होना है।
स्टारलिंक से बढ़ी कमाई, लेकिन घाटे में पहुंची कंपनी
स्पेसएक्स की आय 2025 में 33 प्रतिशत बढ़कर 18.67 अरब डॉलर पहुंच गई। कुल राजस्व में लगभग 60 प्रतिशत योगदान स्टारलिंक का रहा, जिसके 1.03 करोड़ उपयोगकर्ता और 9,600 उपग्रह हैं।
हालांकि, एआई कंपनी एक्सएआई के विलय के बाद स्पेसएक्स को 2025 में 4.94 अरब डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि 2024 में कंपनी ने 79.1 करोड़ डॉलर का लाभ कमाया था।
रॉकेट लॉन्च में प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे
स्पेसएक्स ने 2006 में अपने पहले लॉन्च से लेकर अब तक ऐसी बढ़त हासिल की है कि वह नासा और अमेरिकी रक्षा विभाग की प्रमुख लॉन्च साझेदार बन चुकी है।
कंपनी का पुन: उपयोग योग्य फाल्कन-9 रॉकेट इसकी सफलता का आधार रहा है। वहीं, विकसित किया जा रहा स्टारशिप रॉकेट भविष्य में बड़े पैमाने पर मानव और माल ढुलाई के लिए तैयार किया जा रहा है।
एआई क्षेत्र में ओपनएआई और एंथ्रोपिक से पीछे
स्पेसएक्स का मानना है कि उसका सबसे बड़ा संभावित बाजार एआई है। इसी दिशा में फरवरी में उसने एक्सएआई का अधिग्रहण किया।
हालांकि, बाजार हिस्सेदारी के मामले में एक्सएआई अभी ओपनएआई और एंथ्रोपिक से पीछे है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, व्यावसायिक ग्राहकों में एंथ्रोपिक और ओपनएआई की सेवाओं का उपयोग 30 प्रतिशत से अधिक है, जबकि एक्सएआई की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत के आसपास है।
निवेशकों को प्रीमियम वैल्यूएशन पर दांव
135 डॉलर प्रति शेयर के प्रस्तावित मूल्य पर स्पेसएक्स का प्राइस-टू-सेल्स अनुपात लगभग 94 होगा, जो एनवीडिया, अमेजन और मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों से भी अधिक है।
यह मूल्यांकन स्पेस सेक्टर की कंपनियों प्लैनेट लैब्स और रॉकेट लैब के करीब है, हालांकि वे अपेक्षाकृत छोटी और नई कंपनियां हैं।
स्टारशिप पर टिकी भविष्य की उम्मीदें
स्पेसएक्स के ऊंचे मूल्यांकन की सबसे बड़ी वजह स्टारशिप परियोजना है। यह रॉकेट निचली पृथ्वी कक्षा में 100 मीट्रिक टन से अधिक भार ले जाने में सक्षम होगा, जो वर्तमान में किसी भी अन्य रॉकेट से अधिक है।
कंपनी का मानना है कि स्टारशिप न केवल उसके लॉन्च कारोबार को नई ऊंचाई देगा, बल्कि अंतरिक्ष में एआई डेटा सेंटर स्थापित करने की महत्वाकांक्षा को भी साकार करेगा।
हाल ही में हुए स्टारशिप के परीक्षण में नकली उपग्रहों को सफलतापूर्वक तैनात किया गया और हिंद महासागर में नियंत्रित लैंडिंग भी की गई, जिसे आईपीओ से पहले बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।